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जब चंद्रमा की विशाल छाया में छुप गया सूरज! NASA के आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्रियों ने करीब से देखा ग्रहण

नासा के आर्टेमिस II मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री इस समय कुछ ऐसा देख पा रहे हैं. जो पृथ्वी पर रहने वालों के लिए कभी संभव नही हैं. उन्होंने अंतरिक्ष से ग्रहण देखा और उसके बारे में जानकारी भी दी है, जो देखने में काफी खास है.

X (@SpaceflightNow)
Shanu Sharma

नासा के आर्टेमिस II मिशन में शामिल चार अंतरिक्ष यात्री इस समय पर कुछ ऐसा देख पा रहे हैं, जिसे पृथ्वी से कभी नहीं देखा जा सकता. ओरियन अंतरिक्ष यान चंद्रमा के पीछे से गुजरते समय उन्होंने सूरज को पूरी तरह छिपते देखा. इस घटना का वीडियो अब धरती पर तेजी से शेयर किया जा रहा है.

चंद्रमा की विशाल छाया में सूरज पूरी तरह ओझल होता नजर आ रहा है. जिससे अंतरिक्ष में गहरा और रहस्यमयी अंधेरा छा गया. यह सौर ग्रहण पृथ्वी पर होने वाले किसी भी ग्रहण से बिल्कुल अलग है और वैज्ञानिकों के लिए खास महत्व रखता है.

ग्रहण के दौरान साफ नजर आया कोरोना

इस ग्रहण के दौरान जब सूरज चंद्रमा के पीछे छिप गया, तब अंतरिक्ष यात्री सूरज की बाहरी परत यानी सौर कोरोना को साफ-साफ देख पाएं. इस दौरान चमकता हुआ मुलायम घेरा, हल्की-फुल्की लकीरों जैसा दिखाई दिया. यह आम तौर पर सूरज की तेज रोशनी के कारण छिपा रहता है. वैज्ञानिकों को इस क्षेत्र में विशेष रुचि है क्योंकि सौर कोरोना सूरज की सतह से कहीं अधिक गर्म होता है. यह एक ऐसा अनसुलझा रहस्य है जो सौर भौतिकी के विशेषज्ञों को लंबे समय से हैरान करता रहा है. अंतरिक्ष यात्रियों ने सुरक्षा उपकरणों और उच्च गुणवत्ता वाले कैमरों की मदद से कोरोना की विस्तृत तस्वीरें रिकॉर्ड कर रहे हैं. यह दुर्लभ नजारा केवल देखने के लिए नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रिसर्च के लिए भी अत्यंत जरूरी है. 

अंतरिक्ष से कैसा दिखा ग्रहण?

अंतरिक्ष से कोरोना का अध्ययन करके शोधकर्ताओं को सौर हवाओं, सौर लपटों और सूरज की गतिविधियों को बेहतर समझने में मदद मिलेगी. इसके लिए अंतरिक्ष यात्री जोड़ियों में काम कर रहे हैं. एक यात्री जो कुछ देख रहा है, उसका सावधानीपूर्वक वर्णन कर रहा है. वहीं दूसरा उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरों को कैद कर रहा है. पूरी टीम यह कोशिश कर रही है कि हर महत्वपूर्ण क्षण को दर्ज कर लिया जाए.

ग्रहण के दौरान चंद्रमा भी सामान्य से अलग दिखाई दिया. इसकी सतह पहले से कहीं अधिक गहरी नजर आ रही थी, लेकिन पूरी तरह काली नहीं थी. चंद्रमा के किनारों पर कोरोना की हल्की, रहस्यमयी चमक झांक रही थी, जो इस नजारे को काफी अनोखा और खास बना रही थी. इससे अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के दूर वाले हिस्से की बारीकियां देखने का मौका मिला, जिन्हें तेज धूप में देखना मुश्किल होता है. पृथ्वी पर होने वाले सौर ग्रहण आमतौर पर कुछ मिनटों तक ही रहते हैं, लेकिन आर्टेमिस II के यान की अनोखी यात्रा के कारण यह ग्रहण लगभग एक घंटे तक चला.