यूपी पंचायत इलेक्शन 2026: ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 6 महीने बढ़ा, चुनाव में देरी की बड़ी वजह आई सामने
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पाएंगे. सरकार ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 6 महीने बढ़ा दिया है. जानिए पंचायत चुनाव में देरी की वजह, वोटर लिस्ट और प्रशासनिक समिति पर बड़ा फैसला.
उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। समय पर चुनाव न हो पाने के चलते सरकार ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह माह के लिए बढ़ा दिया है. बता दें कि प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है. यूपी सरकार ने आदेश जारी कर दिया है कि मौजूदा प्रधानों के नेतृत्व वाली प्रशासनिक समिति अगले छह माह तक गांव की सरकार चलाएगी. पंचायती राज विभाग की ओर से देर शाम जारी किए गए आदेश के मुताबिक यूपी में पहली बार गांव की सरकार चलाने के लिए प्रशासनिक समिति बनाई जाएगी.
पंचायत चुनाव में क्यों हुई देरी
यूपी में पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोटेशन तय करने हेतु डैडीकेटेड कमीशन का समय से गठन न किए जाने के कारण सर्वे नहीं हो सका है. पिछले कैबिनेट मीटिंग में कमीशन को मंजूरी के बाद कमीशन का गठन कर दिया गया है, लेकिन रैपिड सर्वे के बाद रिपोर्ट देने में सरकार को छह माह का समय लग सकता है. इसके अलावा एसआईआर के चलते वोटर लिस्ट जारी भी नहीं हो सकी है.
10 जून को आएगी वोटर लिस्ट
फिलहाल राज्य चुनाव आयोग की ओर से पंचायत चुनाव के लिए फाइनल वोटर लिस्ट जारी करने के लिए 10 जून की तारीख दी हुई है. इन दोनों वजहों से यूपी में पंचायत चुनाव समय से नहीं हो पाए और अब राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम जारी हो गया. ऐसे में छह माह तक चुनाव संभव नहीं लग रहे, हालांकि उसके बाद यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो जाएगी. जानकारों का कहना है कि यूपी में पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनाव के बाद ही हो पाएंगे, हालांकि इस संबंध में कोई अधिकारिक जानकारी नहीं है.
राजस्थान, एमपी और उत्तराखंड के बाद यूपी में लागू हुई ये व्यवस्था
उत्तर प्रदेश सरकार ने भी राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड की तर्ज पर ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया है. अब पंचायत चुनाव होने तक मौजूदा प्रधान ही गांवों में विकास कार्य की जिम्मेदारी संभालेंगे. सियासी जानकारों का मानना है कि सरकार विधानसभा चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव कराने के पक्ष में है. उनका कहना है कि प्रधानों को प्रशासक बनाने का फैसला सरकार के पक्ष में जाएगा या खिलाफ, यह तो आने वाला समय ही बताएगा. क्योंकि मौजूदा प्रधान तो सरकार के इस फैसले पर गदगद हैं.