फ्रांस में गर्मी बनी 'साइलेंट किलर', 16 दिनों में 20 हजार से अधिक लोगों की मौत
फ्रांस में भीषण गर्मी के दौरान 16 दिनों में 21,674 मौतें दर्ज हुईं है. सामान्य से 5,764 अधिक मौतों ने हीटवेव, बुजुर्गों की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन पर गंभीर सवाल खड़े किए है.
फ्रांस में 2026 की भीषण गर्मी ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है. फ्रांस की पब्लिक हेल्थ एजेंसी के अनुसार 17 जून से 2 जुलाई के बीच देश में 21,674 लोगों की मौत दर्ज की गई, जबकि सामान्य परिस्थितियों में इसी अवधि में औसतन 15,910 मौतें होती हैं. यानी इस दौरान 5,764 अतिरिक्त मौतें हुईं. इन आंकड़ों ने संकेत दिया है कि हीटवेव अब केवल मौसम से जुड़ी घटना नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बनती जा रही है.
हर मौत सीधे गर्मी से नहीं, लेकिन असर गहरा
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि सभी मौतों का प्रत्यक्ष कारण गर्मी नहीं थी. हालांकि, अत्यधिक तापमान ने पहले से बीमार लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं को गंभीर बना दिया, जिससे मृत्यु दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई. शुरुआती आकलनों में हीटवेव का प्रभाव अपेक्षाकृत कम माना गया था, लेकिन विस्तृत आंकड़ों ने स्पष्ट किया कि गर्मी का असर कहीं अधिक व्यापक रहा. इस अवधि में अस्पतालों और देखभाल केंद्रों पर मरीजों का दबाव भी काफी बढ़ गया.
'अतिरिक्त मौतें' क्या बताती हैं?
स्वास्थ्य एजेंसियां किसी आपदा या असामान्य घटना के प्रभाव का आकलन करने के लिए 'अतिरिक्त मौतों' (Excess Deaths) का विश्लेषण करती हैं. इसमें किसी निश्चित अवधि के दौरान हुई वास्तविक मौतों की तुलना सामान्य वर्षों के औसत से की जाती है. फ्रांस में 17 जून से 2 जुलाई के बीच सामान्य से लगभग 36 प्रतिशत अधिक मौतें दर्ज की गईं. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आंकड़े यह समझने में मदद करते हैं कि किसी प्राकृतिक या स्वास्थ्य संकट का समाज पर वास्तविक प्रभाव कितना व्यापक रहा.
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बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित, जलवायु परिवर्तन पर बढ़ी चिंता
रिपोर्ट के अनुसार अतिरिक्त मौतों में लगभग दो-तिहाई लोग 75 वर्ष या उससे अधिक आयु के थे. इस आयु वर्ग के लोगों के लिए अत्यधिक गर्मी अधिक खतरनाक होती है क्योंकि उनका शरीर तापमान को नियंत्रित करने में अपेक्षाकृत कम सक्षम होता है. करीब आधी मौतें अस्पतालों में दर्ज हुईं, जबकि कई लोगों की जान नर्सिंग होम और घरों में गई. पेरिस और उसके आसपास के इलाकों में लगभग 2,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं.
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में हीटवेव की आवृत्ति और अवधि दोनों बढ़ रही हैं. वर्ष 2003 की भीषण यूरोपीय गर्मी में 70 हजार से अधिक मौतों का अनुमान लगाया गया था. फ्रांस की ताजा स्थिति इस बात का संकेत है कि भविष्य में समय पर चेतावनी, बेहतर स्वास्थ्य तैयारी और जनजागरूकता बढ़ाना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है.