सऊदी अरब के मक्का के पास ड्रोन को इंटरसेप्ट किए जाने के बाद पश्चिम एशिया का तनाव एक बार फिर चर्चा में है. भारत ने घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए सऊदी अरब की संप्रभु सीमा पर हमलों की निंदा की है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता लौटनी चाहिए.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मक्का के पास हुई ड्रोन घटना पर भारत का रुख सामने रखा. उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की संप्रभु सीमा में होने वाले हमलों और नागरिकों की जान तथा जरूरी बुनियादी ढांचे को खतरे में डालने वाली गतिविधियों की भारत निंदा करता है. उन्होंने खास तौर पर मक्का का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शहर दुनियाभर के मुसलमानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है.
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, 15 सितंबर की शाम मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन का पता चला था. सऊदी एयर डिफेंस ने दावा किया कि प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही ड्रोन को नष्ट कर दिया गया. सऊदी पक्ष ने इसे हूती विद्रोहियों से जुड़ा हमला बताया है और कहा है कि मक्का, दोनों पवित्र मस्जिदों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा उसके लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा है. हालांकि, हूती संगठन ने मक्का को निशाना बनाने के आरोप से इनकार किया है.
मक्का की घटना से पहले सऊदी अरब के खमिस मुशैत, अबहा और ताइफ में मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबर सामने आई थी. सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, इन घटनाओं में 13 नागरिक घायल हुए और कुछ घरों तथा वाहनों को नुकसान पहुंचा. इसके बाद यमन में हूती ठिकानों के खिलाफ सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की सैन्य कार्रवाई भी तेज हुई है. इस बढ़ते टकराव का असर सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे और महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर भी पड़ रहा है.
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम के बीच किसी पक्ष के समर्थन की घोषणा करने के बजाय क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल होने की उम्मीद जताई है. विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि नागरिकों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर होने वाले हमले चिंता का विषय हैं. मक्का के धार्मिक महत्व को देखते हुए भारत की प्रतिक्रिया विशेष रूप से अहम है. इस बीच सऊदी अरब में सुरक्षा स्थिति को लेकर भी सतर्कता बढ़ी हुई है और क्षेत्रीय संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति तथा समुद्री मार्गों पर दबाव बना हुआ है.