मॉरिशस दौरे पर PM मोदी, क्या भरेगा पड़ोसी देश का खजाना? यहां जानें
PM Modi Mauritius Visit: मॉरिशस के साथ भारत के संबंध काफी मजबूत रहे हैं और दोनों देश एक-दूसरे के साथ व्यापार भी करते हैं. इसी कड़ी में अब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मॉरिशस के दौरे पर गए हैं. इससे पहले वहां के विदेश मंत्री ने एक बड़ी मांग की है और डबल टैक्सेशन अवाइडेंस कन्विकेशन (DTAC) में बदलाव की मांग की है.
PM Modi Mauritius Visit: मॉरिशस के साथ भारत के संबंध काफी मजबूत रहे हैं और दोनों देश एक-दूसरे के साथ व्यापार भी करते हैं. इसी कड़ी में अब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मॉरिशस के दौरे पर गए हैं. इससे पहले वहां के विदेश मंत्री ने एक बड़ी मांग की है और डबल टैक्सेशन अवाइडेंस कन्विकेशन (DTAC) में बदलाव की मांग की है. ये बदलाव मॉरिशस के विदेश और व्यापार मंत्री धनंजय रामफुल ने की है.
रामफुल ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत के दौरान बताया कि मॉरीशस का यह मानना है कि दोहरे कराधान से बचाव समझौते (DTAC) में संशोधन की जरूरत है. इसके लिए कुछ मुद्दों पर चर्चा जारी है, और एक बार जब यह मुद्दे सुलझ जाएंगे, तो एक नया प्रोटोकॉल हस्ताक्षरित किया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि एक संयुक्त समिति की बैठक जल्द ही होगी, जिसमें इस समझौते और व्यापक आर्थिक सहयोग और साझेदारी समझौते (CECPA) की समीक्षा की जाएगी.
CECPA और भारत से व्यापार असंतुलन
मॉरीशस ने भारत के साथ 2005 में CECPA पर हस्ताक्षर किए थे, जो दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से था. हालांकि, इस समझौते के संशोधन के बाद से मॉरीशस से भारत में विदेशी निवेश (FDI) में गिरावट आई है. रामफुल ने कहा कि मॉरीशस से भारत को निर्यात में कमी आई है और यह स्थिति चिंता का कारण बन रही है.
2016 संशोधन के बाद एफडीआई में गिरावट
2016 में किए गए संशोधन के बाद से, जो कर बचाव के उपायों को सख्त करने का उद्देश्य रखते थे, मॉरीशस से भारत में आने वाले विदेशी निवेश में भारी गिरावट देखी गई है. 2016-17 में यह आंकड़ा 15.72 बिलियन डॉलर था, जो 2022-23 में घटकर 6.13 बिलियन डॉलर हो गया. हालांकि, 2023-24 में एफडीआई में फिर से वृद्धि देखी गई, और यह आंकड़ा 7.97 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिससे मॉरीशस ने एक बार फिर भारत के दूसरे सबसे बड़े एफडीआई स्रोत का स्थान प्राप्त किया.
सिंगापुर के समान प्राथमिकता की मांग
रामफुल ने भारत से मॉरीशस के लिए वही प्राथमिकता देने की मांग की है, जो सिंगापुर को मिलती है. उन्होंने कहा कि यदि सिंगापुर को बेहतर लाभ मिल सकता है, तो मॉरीशस को भी समान या बेहतर लाभ मिलना चाहिए. इससे उन्हें उम्मीद है कि मॉरीशस एक बार फिर निवेश के प्रमुख गेटवे के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा.