भारत-चीन को साथ लाने में कामयाब हुआ मालदीव, इस कदम से अमेरिका को लगेगा बड़ा झटका

India China Maldives Relations: मालदीव ने बुधवार को एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि भारत और चीन दोनों आयात के भुगतान के लिए अमेरिकी डॉलर के बजाय अपनी-अपनी स्थानीय मुद्रा का उपयोग करने के प्रयासों में सहयोग करने के लिए सहमत हो गए हैं.

IDL
India Daily Live

India China Maldives Relations: मालदीव ने भारत और चीन के साथ मिलकर एक ऐसी व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की है जो द्विप राष्ट्र के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. अब मालदीव इन दोनों देशों से होने वाले आयात के भुगतान अमेरिकी डॉलर के बजाय उनकी स्थानीय मुद्राओं में कर सकेगा. इससे मालदीव को सालाना करीब 1.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की बचत होने की उम्मीद है.

भारत-चीन को साथ लाने में कामयाब हुआ मालदीव 

मालदीव के आर्थिक विकास मंत्री मोहम्मद सईद ने बताया कि उन्होंने दो हफ्ते पहले भारतीय उच्चायुक्त मुनु महावर से मुलाकात की थी. इस दौरान महावर ने आश्वासन दिया कि भारत आयात भुगतान को भारतीय रुपये में करने की व्यवस्था करने में सहयोग देगा.

इसी तरह, सईद ने बताया कि उन्हें दो दिन पहले चीन के वाणिज्य मंत्रालय से एक पत्र मिला है. इस पत्र में चीन ने मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़ू के अनुरोध पर आयात भुगतान चीनी मुद्रा युआन में करने के विकल्प की सुविधा देने का आश्वासन दिया है.

अमेरिका को लगेगा बड़ा झटका

गौरतलब है कि मालदीव हर साल भारत से 78 करोड़ अमेरिकी डॉलर और चीन से 72 करोड़ अमेरिकी डॉलर मूल्य का सामान आयात करता है. अप्रैल में जब मालदीव ने इस व्यवस्था पर चर्चा शुरू की थी, तब भी मंत्री सईद ने यह जानकारी दी थी.

दो देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एक दूसरे के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने में मददगार साबित होता है. साथ ही, यह कदम अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन में अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को भी कम करेगा.

जुलाई 2023 में, भारत सरकार ने मालदीव को उन 22 देशों में शामिल किया था जिन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक से स्थानीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए विशेष रुपया वोस्ट्रो खाते (एसआरवीए) खोलने की अनुमति दी गई थी.

मालदीव के दोनों हाथ में लड्डू

समाचार पोर्टल Sun.mv ने बुधवार को बताया कि सईद ने सरकारी मीडिया पीएसएम मीडिया से बात करते हुए कहा: "मालदीव हर साल भारत और चीन दोनों से लगभग 600-700 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का सामान आयात करता है. इसलिए, हम दोनों बाजारों से मिलाकर सालाना लगभग 1.4 बिलियन से 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का सामान आयात करते हैं."

सईद ने आगे बताया, "हम दोनों देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं ताकि व्यवस्था बनाई जा सके. उदाहरण के लिए, चीन से आयात के लिए, शिपिंग कंपनी चालान ला सकती है और मालदीवियन रूफिया को बैंकों के माध्यम से उनकी स्थानीय मुद्रा में परिवर्तित करके भुगतान का निपटारा किया जा सकता है. इससे दोनों देशों से होने वाले 1.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के वार्षिक आयात पर 50 प्रतिशत तक की बचत होगी."

कम हो जाएगी अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता

उन्होंने आगे कहा कि अगर हम हर देश से 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक की व्यवस्था कर सकते हैं, तो इसका मतलब है कि 700 मिलियन अमेरिकी डॉलर. इसका मतलब है कि हम भविष्य में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को उतनी राशि से कम कर सकते हैं. इससे डॉलर की मांग कम हो जाएगी. और भविष्य में डॉलर की मांग लगातार कम होती रहेगी.

सईद ने पूर्व प्रशासन पर वित्तीय स्थिति खराब होने का आरोप लगाया और इस बात से सहमत हुए कि चुनौतियां बनी हुई हैं क्योंकि विदेशी देश अभी भी मालदीव के बारे में संशय में हैं, लेकिन "यह धीरे-धीरे सुधार रहा है."

नये मालदीव प्रशासन ने कहा है कि देश की आर्थिक स्थिति "चिंताजनक" थी, लेकिन सरकार इस मुद्दे को सुधारने के लिए मजबूत वित्तीय सुधार लागू कर रही है, जिसमें पैसा छापना बंद करना भी शामिल है.

अप्रैल में, संसदीय चुनावों से पहले प्रचार के दौरान, सईद ने कहा था कि अगर सत्तारूढ़ पार्टी संसद में बहुमत हासिल करने में सफल होती है, तो वे "लगभग दो सालों के भीतर डॉलर की दर को वापस आधिकारिक बाजार मूल्यों पर लाने" में सक्षम होंगे. 87 सदस्यीय पीपुल्स मजलिस में राष्ट्रपति मुइजू के नेतृत्व वाले पीपुल्स नेशनल कांग्रेस (पीएनसी) ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया.

विशेषज्ञों का मानना है कि मालदीव और भारत और चीन के बीच यह समझौता द्विप राष्ट्र के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. इससे न केवल मालदीव को विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि इससे क्षेत्रीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा. यह कदम इस बात का भी संकेत है कि वैश्विक व्यापार में अमेरिकी डॉलर का वर्चस्व धीरे-धीरे कम हो रहा है.