menu-icon
India Daily

आग से खेल रहे हैं मुइज्जू, तुर्की के किलर ड्रोन कर सकते हैं भारत की जासूसी!

India Maldives Ties:  मालदीव ने हाल में अपनी समुद्री सुरक्षा की निगरानी के लिए तुर्की से टीबी2 ड्रोन की खरीदी की है. इन ड्रोन्स को लेकर भारत के रक्षा जानकारों ने चिंता जताई है.

Shubhank Agnihotri
आग से खेल रहे हैं मुइज्जू, तुर्की के किलर ड्रोन कर सकते हैं भारत की जासूसी!

India Maldives Ties: मालदीव ने तुर्की से खरीदे  गए किलर ड्रोन के जरिए अपने समुद्री क्षेत्रों की निगरानी शुरू कर दी है. बीते दिनों मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स ( MNDF) ने इसका एक वीडियो भी जारी किया जिसमें तुर्की से खरीदे गए बायकर टीबी 2 ड्रोन उड़ान भरते हुए नजर आ रहा है. नूनू माफारू एयरपोर्ट से इस ड्रोन को संचालित किया गया. चीन मोह में फंसे मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू लगातार भारत विरोधी रुख अपनाए हुए हैं. सैन्य मामलों के जानकारों ने कहा है कि मालदीव समुद्री सुरक्षा निगरानी में इस्तेमाल किए जा रहे ड्रोन्स का उपयोग भारतीय नौसेना की निगरानी में भी हो सकता है. इससे दोनों देशों के संबंधों में और गिरावट आ सकती है. 

मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस के सीनियर फेलो मेजर जनरल डा. मंदीप सिंह ने भारत की सुरक्षा के संबंध में मालदीव में तुर्की बायकर टीबी2 ड्रोन की हालिया तैनाती के प्रभावों पर कहा कि मालदीव तुर्की से खरीदे गए ड्रोन से अपने विशेष समुद्री क्षेत्र की निगरानी करना चाहता है जो लगभग 9 मिलियन वर्ग किमी का है. तुर्की के साथ किए गए समझौते के तहत यह ड्रोन पिछले हफ्ते ही मालदीव पहुंचे थे. मालदीव ने तुर्की के साथ 37 मिलियन अमेरिकी डॉलर में यह समझौता किया था.

मेजर जनरल के मुताबिक, पूरे मालद्वीव में 26 एटाल ( प्रवाल द्वीप ) हैं जो उत्तर से दक्षिण तक 820 किमी की दूरी में फैले हुए हैं. मालदीव में कुल पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे हैं लेकिन इनमें सबसे महत्वपूर्ण है माले और दूसरा उत्तर में नूनू एटोल पर माफारू. नूनू माफारू एयरपोर्ट से ही तुर्की के किलर ड्रोन ने समुद्री सुरक्षा की निगरानी के लिए पहली बार उड़ान भरी. माफारू एयरपोर्ट से भारत के पश्चिमी तट कोच्चि 550 किमी की दूरी पर है और त्रिवेंद्रम 495 किमी की दूरी पर है जहां भारत के नौसैन्य बेस मौजूद हैं. 

 नौसैनिक अड्डों के लिए क्या खतरा?

मेजर जनरल ने आगे कहा कि मालदीव ने इन ड्रोन की तैनाती एक बड़े क्षेत्र को छोड़कर उत्तरी क्षेत्र में ही क्यों की यह बड़े सवाल खड़े करता है?  उन्होंने बताया कि तुर्की के बायकर टीबी 2  ड्रोन 300 किमी की संचार सीमा के साथ प्रभावी तरीके से निगरानी करने में सक्षम हैं. ये ड्रोन भारत के मिनिकॉय द्वीप की भी निगरानी कर सकते हैं जहां पर भारत ने हाल ही में अपना नया नौसैनिक अड्डा INS जटायु स्थापित करने की घोषणा की है. मालदीव के ये ड्रोन भारत के पश्चिमी तट पर नौसैनिक गतिविधियों की निगरानी करने में सक्षम है.  

 करनी होगी बारीकी से निगरानी 

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान भी तुर्की के टीबी2 ड्रोन का इस्तेमाल करता है जो मालदीव सरकार के साथ पिछले समझौतों के आधार पर संयुक्त गश्त की संभावनाओं पर भी किसी समझौते पर विचार कर सकता है. यह भारत के लिए चिंता बढ़ाने वाला होगा. उन्होंने कहा कि जिस तरह से मालदीव पर चीन, तुर्की का सैन्य सहयोग बढ़ रहा है इसे ध्यान रखते हुए भारतीय रक्षा जानकारों और रणनीतिकारों को मालदीव के इन ड्रोन्स की बारीकी से निगरानी करनी चाहिए. 

भारत के खिलाफ चलाया अभियान

मालदीव की सत्ता संभालने के बाद मुइज्जू ने देश में तैनात भारतीय सैन्य बलों की टुकड़ी को वापस भेजने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया है. यह टुकड़ी चिकित्सा और तकनीकी सहायता में माले का सहयोग करती थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने मालदीव के भीतर निगरानी विमान चलाने वाले सैन्य कर्मियों की वापसी भी शुरू कर दी है. अड्डू के सबसे दक्षिणी एटोल में तैनात पच्चीस भारतीय सैनिकों ने 10 मार्च से पहले ही इस द्वीपीय देश को छोड़ दिया है.