हमेशा के लिए खामोश हो गया 'पहाड़ों का शेर', हिमस्खलन ने छीन ली निर्मल पुर्जा की जिंदगी
नेपाल के प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल 'निम्सदाई' पुर्जा की पाकिस्तान के ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन में मौत की पुष्टि हो गई है. 14 आठ हजार मीटर से ऊंची चोटियों को रिकॉर्ड समय में फतह करने वाले पुर्जा पर्वतारोहण जगत की बड़ी शख्सियत थे.
नई दिल्ली: दुनिया के सबसे चर्चित पर्वतारोहियों में शामिल नेपाल के निर्मल 'निम्सदाई' पुर्जा अब इस दुनिया में नहीं रहे. पाकिस्तान के काराकोरम पर्वत श्रृंखला स्थित ब्रॉड पीक पर अभियान के दौरान आए भीषण हिमस्खलन में उनकी मौत की पुष्टि हुई है. इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण समुदाय को गहरा झटका दिया है. रिकॉर्ड समय में दुनिया की 14 सबसे ऊंची चोटियों को फतह कर इतिहास रचने वाले पुर्जा अपनी साहसिक उपलब्धियों और प्रेरणादायक व्यक्तित्व के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते थे.
43 वर्षीय निर्मल पुर्जा ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के लिए अभियान का नेतृत्व कर रहे थे. गुरुवार दोपहर अचानक आए हिमस्खलन के बाद पूरी टीम से संपर्क टूट गया था. अभियान में नेपाल, पाकिस्तान, अमेरिका, ओमान और चीन के कुल 10 पर्वतारोही शामिल थे. अगले दिन अभियान से जुड़ी संस्था ने सोशल मीडिया के माध्यम से पुर्जा की मौत की पुष्टि कर दी.
रिकॉर्ड जिसने दुनिया को चौंका दिया
निर्मल पुर्जा ने वर्ष 2019 में महज छह महीने से कुछ अधिक समय में दुनिया की 14 ऐसी चोटियों को फतह किया था, जिनकी ऊंचाई 8 हजार मीटर से अधिक है. इस उपलब्धि के साथ उन्होंने दक्षिण कोरिया के पर्वतारोही किम चांग-हो का सात वर्ष पुराना विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया. उनकी इस ऐतिहासिक यात्रा पर बाद में एक चर्चित डॉक्यूमेंट्री भी बनाई गई.
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सेना से पर्वतारोहण तक का सफर
पर्वतारोहण में पहचान बनाने से पहले पुर्जा ने 16 वर्षों तक ब्रिटिश सेना में सेवा दी थी. उन्होंने पहले गोरखा ब्रिगेड और बाद में रॉयल नेवी की स्पेशल बोट सर्विस में काम किया. वर्ष 2018 में उत्कृष्ट सैन्य सेवाओं के लिए उन्हें एमबीई सम्मान से भी नवाजा गया. वर्ष 2012 में एवरेस्ट बेस कैंप की यात्रा ने उनके भीतर पर्वतारोहण का जुनून पैदा किया.
दुनिया की सबसे कठिन चोटियों में शामिल ब्रॉड पीक
ब्रॉड पीक की ऊंचाई 8,051 मीटर है और यह दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी मानी जाती है. काराकोरम पर्वत श्रृंखला में के2 के निकट स्थित यह पर्वत तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है. खराब मौसम, बर्फीले ढलान और लगातार हिमस्खलन का खतरा इसे अनुभवी पर्वतारोहियों के लिए भी कठिन बना देता है.
पर्वतारोहण जगत ने खोया प्रेरणास्रोत
निर्मल पुर्जा केवल रिकॉर्ड बनाने वाले पर्वतारोही नहीं थे, बल्कि नेपाल के पर्वतीय समुदायों के लिए भी लगातार काम करते रहे. उनकी संस्था पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मदद और विकास के लिए सक्रिय थी. उनके निधन से पर्वतारोहण जगत ने एक ऐसे साहसी व्यक्तित्व को खो दिया, जिसने असंभव दिखने वाले लक्ष्यों को भी अपने संकल्प और मेहनत से संभव कर दिखाया.