menu-icon
India Daily

अंतरिम पीएम के लिए कुलमान घीसिंग का नाम, पूर्व न्यायाधीश शीला कार्की रेस से बाहर, नेपाल का अंतरिम प्रधानमंत्री कौन होगा?

इसमें पहले पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की के नाम पर सहमति बनने की खबर आई थीं, लेकिन दोपहर एक बजे तक 'लाइट मैन' कहे जाने वाले कुलमान घीसिंग का नाम सामने आ गया.

Gyanendra Sharma
अंतरिम पीएम के लिए कुलमान घीसिंग का नाम, पूर्व न्यायाधीश शीला कार्की रेस से बाहर, नेपाल का अंतरिम प्रधानमंत्री कौन होगा?
Courtesy: Social Media

Nepal Protests: नेपाल में तख्तापलट के बाद नई सरकार बनाने की कवायत तेज हो गई है. Gen-Z नेता में फिलहाल पीएम फेस को लेकर सहमति नहीं बन पाई है. अनिल बनिया और दिवाकर दंगल ने कहा, युवाओं का यह विरोध-प्रदर्शन बुजुर्ग नेताओं से तंग आकर किया है. हमारा मकसद संविधान नहीं, संसद भंग करना है. नेपाल के बिजली संकट को हल करने वाले इंजीनियर कुलमान घीसिंग, हिमालयी राष्ट्र में अंतरिम सरकार का नेतृत्व कर सकते हैं.

इसमें पहले पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की के नाम पर सहमति बनने की खबर आई थीं, लेकिन दोपहर एक बजे तक 'लाइट मैन' कहे जाने वाले कुलमान घीसिंग का नाम सामने आ गया. गुरुवार दोपहर एक संक्षिप्त बयान में 'जेन जी प्रोटेस्ट' समूह ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की छह घंटे की वर्चुअल बैठक में कम से कम दो अन्य नामों काठमांडू के मेयर बालेंद्र 'बालेन' शाह और नेपाल सुप्रीम कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की पर विचार किया गया.

कुलमान घीसिंग का नाम आया सामने

घीसिंग का चयन जिन्हें प्रदर्शनकारियों ने "एक देशभक्त और सबका चहेता" कहा था आश्चर्यजनक है. काठमांडू से मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश कार्की ने अस्थायी नियंत्रण वाली सेना के साथ नई सरकार बनाने के लिए बातचीत शुरू कर दी है. घीसिंग की पदोन्नति ने प्रदर्शनकारियों के भीतर दरार की सुगबुगाहट शुरू कर दी है, खासकर उन रिपोर्टों के बाद जिनमें कहा गया है कि उनकी पहली पसंद बालेन शाह ने अंतरिम प्रशासन का नेतृत्व करने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है.

48 घंटे पहले आपातकाल की घोषणा

सूत्रों ने बताया कि अंतरिम प्रमुख चाहे कोई भी हो, सेना राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल द्वारा शपथ ग्रहण से 48 घंटे पहले आपातकाल की घोषणा कर सकती है. प्रस्तावित अंतरिम सरकार की संरचना अभी स्पष्ट नहीं है. नेपाल के 2015 के संविधान के अनुसार, नए प्रधानमंत्री का चुनाव उस पार्टी से होना चाहिए जिसके पास बहुमत हो. अगर बहुमत नहीं है, तो राष्ट्रपति किसी उत्तराधिकारी की नियुक्ति करते हैं, या कोई भी सांसद विश्वास मत का सामना करने के लिए आगे आ सकता है. अगर वे विश्वास मत में विफल रहते हैं, तो सदन भंग किया जा सकता है और चुनाव कराए जा सकते हैं.