नाइट क्लब में बाउंसर की नौकरी करने वाला कैसे बना कनाडा का प्रधानमंत्री? जस्टिन ट्रूडो के उत्थान से लेकर पतन तक की पूरी कहानी
राजनीति में आने से पहले जस्टिन ने शिक्षक, नाइट क्लब बाउंसर, और स्नोबोर्ड प्रशिक्षक के रूप में काम किया था. ट्रूडो ने अपने कार्यकाल में कई प्रगतिशील कदम उठाए, जिनसे उन्हें अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली. वह पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक न्याय, और इमिग्रेशन सुधारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते थे.
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. अपने राजनीतिक सफर के दौरान जस्टिन ने कई ऊंचाइयों को छुआ, लेकिन कहते हैं ना कि अंत बुरा तो सब बुरा. विपक्ष की भारी आलोचनाओं और अपनी ही पार्टी में घिरने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. नाइट क्लब के बाउंसर से उन्होंने कैसे प्रधानमत्री पद तक का सफर तय किया, आइए जानते हैं....
जस्टिन ट्रूडो का प्रारंभिक जीवन और राजनीति में प्रवेश
जस्टिन ट्रूडो, कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री पियरे ट्रूडो के बेटे हैं, जिन्होंने 2015 में प्रधानमंत्री पद संभाला. उनका राजनीतिक जीवन केवल उनके नाम के कारण नहीं था, बल्कि उनकी व्यक्तिगत खासियत और आकर्षक व्यक्तित्व ने भी उन्हें एक स्टार बना दिया. ट्रूडो की उम्र और उनके अच्छे दिखने के कारण पहले तो विपक्ष ने उनका मजाक उड़ाया, लेकिन उन्होंने 2015 के चुनाव में शानदार जीत हासिल की.
राजनीति में आने से पहले जस्टिन ने शिक्षक, नाइट क्लब बाउंसर, और स्नोबोर्ड प्रशिक्षक के रूप में काम किया था. उनका यह विविध अनुभव उन्हें समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़ने का मौका देता था, और उन्होंने अपनी छवि को एक प्रगतिशील और युवा नेता के रूप में स्थापित किया.
ट्रूडो का उत्थान: प्रगतिशील नीतियों और वैश्विक नेतृत्व की ओर
ट्रूडो ने अपने कार्यकाल में कई प्रगतिशील कदम उठाए, जिनसे उन्हें अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली. वह पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक न्याय, और इमिग्रेशन सुधारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते थे. उनकी सरकार ने नस्लीय समानता और लिंग समानता को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए, जैसे कि एक समान लिंग प्रतिनिधित्व वाला कैबिनेट और कनाडा में कैनबिस को वैध बनाना.
ट्रूडो ने इमिग्रेशन के मामलों में भी उदार रुख अपनाया और कई देशों के मुकाबले कनाडा में शरणार्थियों और प्रवासियों को स्वागत दिया. इसके अलावा, उनकी सरकार ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कार्बन टैक्स लागू किया और अल्बर्टा में तेल पाइपलाइन के विस्तार को पुनः आरंभ किया, हालांकि यह कदम विवादास्पद था.
पतन की ओर बढ़ते हुए: आलोचनाएं और असंतोष
हालांकि ट्रूडो की कई प्रगतिशील नीतियों ने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई, लेकिन उनके नेतृत्व में कनाडा में असंतोष बढ़ने लगा. बढ़ती हुई खाद्य और आवास लागत, विशेष रूप से निम्न और मध्यम वर्ग के लिए, उनकी लोकप्रियता में गिरावट का कारण बनी. इसके अलावा, उनकी आव्रजन नीति भी कुछ वर्गों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुई.
ट्रूडो के खिलाफ असंतोष उस समय और बढ़ा जब कनाडा के वित्त मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड ने दिसंबर 2023 में उनके आर्थिक निर्णयों की आलोचना करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद कई अन्य मंत्रियों ने भी उनके नेतृत्व पर सवाल उठाए और यह स्पष्ट हो गया कि ट्रूडो का राजनीतिक भविष्य खतरे में है.
भारत के साथ तनाव और अंतर्राष्ट्रीय विवाद
2023 में भारत और कनाडा के बीच तनाव और बढ़ गया जब ट्रूडो ने भारत पर खालिस्तान आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया. यह आरोप भारत द्वारा नकारा गया और इसने दोनों देशों के बीच भारी कूटनीतिक संकट पैदा कर दिया. भारत ने कनाडा के छह राजनयिकों को निष्कासित कर दिया और इस मुद्दे को लेकर कई कड़े बयान दिए.
ट्रूडो के इस आरोप के कारण कनाडा में खालिस्तान समर्थकों के समर्थन को लेकर भी सवाल उठे. यह भी आरोप लगाया गया कि ट्रूडो ने भारतीय मामलों में दखल देने का कदम केवल खालिस्तान समर्थकों के वोट बैंक को बढ़ाने के लिए उठाया, जो उनकी राजनीति का हिस्सा बन चुका था.
जस्टिन ट्रूडो का इस्तीफा और भविष्य
जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार को यह घोषणा की कि वह पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री के रूप में इस्तीफा देने का इरादा रखते हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें यह स्पष्ट हो गया है कि वह आगामी चुनावों में कनाडाई जनता के लिए सबसे अच्छा विकल्प नहीं हो सकते. ट्रूडो के इस्तीफे की घोषणा से पहले ही उनके खिलाफ दबाव बढ़ चुका था और यह अनुमान लगाया जा रहा था कि उनका राजनीतिक भविष्य खत्म हो चुका है.