बजट के बाद शेयर बाजार में सबसे बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 2500, निफ्टी निफ्टी 775 अंक टूटा, जानें क्या रहे कारण
शेयर बाजार में गुरुवार को तेज गिरावट देखी गई, जहां सेंसेक्स और निफ्टी 3% से ज्यादा टूट गए. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेत इसके प्रमुख कारण रहे.
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई. सेंसेक्स करीब 2600 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी 23,000 के नीचे फिसल गया. पिछले तीन दिनों की तेजी अचानक थम गई और बाजार पर बिकवाली का दबाव हावी हो गया. वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की दिशा को नकारात्मक बना दिया.
कच्चे तेल की कीमतों का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल देखा गया, जो 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई. भारत जैसे आयातक देश के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है. इससे महंगाई बढ़ने और आर्थिक संतुलन बिगड़ने की आशंका पैदा होती है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता है.
वैश्विक संकेतों से बढ़ी कमजोरी
एशियाई और अमेरिकी बाजारों में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया. निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और उन्होंने जोखिम से दूरी बनानी शुरू कर दी. वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ने से घरेलू बाजार में भी दबाव बना रहा और सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगातार बिकवाली जारी रखी, जिससे बाजार में नकदी की कमी महसूस हुई. बड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई, खासकर बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में. निवेशकों के बाहर निकलने से बाजार का संतुलन बिगड़ गया और गिरावट और गहरी हो गई.
बढ़ती अस्थिरता और ब्याज दरों का दबाव
बाजार की अस्थिरता को दर्शाने वाला इंडेक्स इंडिया VIX तेजी से बढ़ा, जो निवेशकों की घबराहट को दिखाता है. वहीं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने भी निवेशकों को सतर्क कर दिया. ऊंची ब्याज दरों के कारण उभरते बाजारों में निवेश कम आकर्षक हो जाता है, जिससे भारतीय बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना.