'चारो तरफ से घेर कर गला घोटने की कोशिश की, अब खुद...', शांति वार्ता फेल होने पर बोले नेतन्याहू
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता बिना किसी नतीजे की खत्म हो गई. 21 घंटे तक बातचीत करने के बाद भी कोई सफल नतीजे सामने नहीं आए. इसके बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बंजामानि नेतन्याहू ने बड़ा बयान दिया है.
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई. इसके बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है. उन्होंने दावा किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं के खिलाफ चलाया गया संयुक्त अभियान ऐतिहासिक सफलता हासिल कर चुका है.
नेतन्याहू ने कहा कि यह अभियान अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन इसमें अब तक जो सफलता मिली है, वह इजरायल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने ईरान द्वारा इजरायल को चारों तरफ से घेरने की रणनीति का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान ने गाजा में हमास, लेबनान में हिजबुल्लाह, सीरिया में असद शासन, इराक में विभिन्न मिलिशिया समूहों और यमन में हूती विद्रोहियों के जरिए हमें घेरकर गला घोंटने की कोशिश की थी.
ईरान पर लगाए गंभीर आरोप
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने आगे कहा कि ईरान खुद हमारा गला घोंटना चाहता था, लेकिन आज स्थिति उलट गई है. हम उनका गला घोंट रहे हैं. उन्होंने हमें पूरी तरह नष्ट करने की धमकियां दी थीं, लेकिन अब वे खुद बचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. नेतन्याहू ने याद दिलाया कि यह पूरा अभियान 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के साथ शुरू हुआ था. उनके अनुसार, इन कार्रवाइयों ने ईरान की सैन्य और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया है.
क्या है अमेरिका और ईरान की राय?
नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब शनिवार को पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष बातचीत हुई, वार्ता रविवार को बिना किसी निष्कर्ष के समाप्त हो गई. अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ईरान ने इन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया. ईरानी अधिकारियों ने कहा कि वे अपने वैध अधिकारों, खासकर परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के मुद्दे पर किसी भी समझौते में समझौता नहीं करेंगे. विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-ईरान वार्ता की विफलता पूरे मध्य पूर्व के सुरक्षा परिदृश्य को और जटिल बना सकती है. इजरायल लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता रहा है, जबकि ईरान इजरायल को क्षेत्रीय अस्थिरता का मुख्य कारण बताता है.
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