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नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का इजरायल ने मिसाइलों से किया स्वागत, देखते रह गई ईरानी जनता

हमलों की घोषणा ऐसे समय में हुई जब तेहरान के एंगहेलाब स्क्वायर पर हजारों लोग जमा हुए थे. ये लोग ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के समर्थन में इकठ्ठा हुए थे.भीड़ के हाथों में मोजतबा खामेनेई की तस्वीरें और ईरानी झंडे दिखाई दे रहे थे.

Anuj

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल ने ईरान के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर हमले शुरू कर दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली सेना ने राजधानी तेहरान, इस्फहान और दक्षिणी ईरान के कुछ हिस्सों को निशाना बनाया. इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि कार्रवाई ईरान के सैन्य और रणनीतिक ढांचे को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई है.

आईडीएफ की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इजरायली सेना ने तेहरान, इस्फहान और दक्षिणी ईरान में मौजूद 'आतंकी शासन के इंफ्रास्ट्रक्चर' पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए हैं. सेना का कहना है कि यह कार्रवाई क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए की गई है.

नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का समर्थन

इन हमलों की घोषणा ऐसे समय में हुई जब तेहरान के एंगहेलाब स्क्वायर पर हजारों लोग जमा हुए थे. ये लोग ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के समर्थन में इकठ्ठा हुए थे.भीड़ के हाथों में मोजतबा खामेनेई की तस्वीरें और ईरानी झंडे दिखाई दे रहे थे. राजधानी के कई हिस्सों में उनके समर्थन में नारेबाजी भी की गई.

दरअसल ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता चुना गया है. ईरान की वह संस्था जो सुप्रीम लीडर का चयन करती है, उसने 56 वर्षीय मोजतबा को आधिकारिक तौर पर यह जिम्मेदारी सौंपी.

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के साथ करीबी संबंध

मोजतबा खामेनेई लंबे समय से ईरान की राजनीति में पर्दे के पीछे प्रभावशाली माने जाते रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि उनके ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के साथ बेहद करीबी संबंध हैं. हालांकि उन्होंने अब तक कोई बड़ा सार्वजनिक राजनीतिक पद नहीं संभाला है.

ताजपोशी पर उठे सवाल

अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद से ही मोजतबा को उनका संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा था, लेकिन ईरानी नेतृत्व ने काफी समय तक इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की थी. इस बीच ईरान के कुछ राजनीतिक और सामाजिक वर्गों ने सत्ता के इस तरह पारिवारिक हस्तांतरण पर सवाल भी उठाए हैं.

आलोचकों का कहना है कि यह स्थिति 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद खत्म की गई राजशाही की याद दिलाती है. बताया जा रहा है कि क्षेत्र में जारी युद्ध के बाद से मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से बहुत कम नजर आए हैं. वहीं इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई से पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा गया है.