इजराइल और लेबनान संघर्ष-विराम को फिर से लागू करने पर हुए सहमत

इजराइल और लेबनान ने युद्धविराम शुरू करने के लिए एक समझौता किया जो वाशिंगटन में अमेरिका की अगुवाई में हुई बातचीत के बाद हुआ. दोनों देशों का कहना है कि युद्धविराम तभी काम करेगा जब ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह द्वारा गोलीबारी को पूरी तरह से बंद हो जाएगी.

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Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: इजराइल और लेबनान ने युद्धविराम शुरू करने के लिए एक समझौता किया जो वाशिंगटन में अमेरिका की अगुवाई में हुई बातचीत के बाद हुआ. दोनों देशों का कहना है कि युद्धविराम तभी काम करेगा जब ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह द्वारा गोलीबारी को पूरी तरह से बंद हो जाएगी. इजराइल और लेबनान के बीच कोई आधिकारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं. फिर भी, वे दक्षिणी लेबनान में खास पायलट जोन बनाने पर सहमत हुए. 

बता दें कि इन इलाकों में, सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ लेबनान की आधिकारिक सेना के पास होगी. किसी भी दूसरे ग्रुप को वहां काम करने की इजाजत नहीं होगी, जिसमें खासतौर से हिज्बुल्लाह शामिल है. दोनों पक्षों ने 22 जून वाले हफ्ते में एक बार फिर से मिलने का भी फैसला किया है. इस दौरान राजनीतिक और सुरक्षा को लेकर बात की जाएगी. 

लेबनान का भविष्य ही दोनों देशों की सरकारें ही तय करेंगी:

इस बयान से यह साफ हो गया है कि इजरायल और लेबनान के बीच भविष्य के संबंध केवल दोनों देशों की सरकारें ही तय करेंगी. इसमें दूसरे देशों या ग्रुप्स की तरफ से लेबनान के भविष्य को कंट्रोल करने या उसमें दखल देने की किसी भी कोशिश को खारिज कर दिया गया है. इसे ईरान और हिज्बुल्लाह के लिए एक सीधा संदेश माना गया है.

दोनों पक्षों ने किया वादा:

बता दें कि इस घोषणा के बाद भी लड़ाई जारी रही. हिज्बुल्लाह ने कहा कि उसने बुधवार को उत्तरी इजराइल पर मिसाइलें दागीं. उसी समय, लेबनान ने बताया कि दक्षिणी लेबनान में इजराइली हमलों में कम से कम नौ लोग मारे गए, जिनमें दो पैरामेडिक भी शामिल थे.

दोनों पक्ष कुछ समय से एक-दूसरे पर गोलीबारी कर रहे हैं, जिससे सीमा के दोनों तरफ काफी नुकसान भी हो रहा है. ऐसी उम्मीद की जार ही है कि अमेरिका के समर्थन वाला यह नया युद्धविराम समझौता आखिरकार शांति ला सकता है. हालांकि, देखना यह होगा कि यह शांति या फिर समझौता कब तक टिक सकता है.