ईरान बना दूसरा पाकिस्तान, सेना के हाथों में गई देश की कमान; US से बढ़ सकता है टकराव
ईरान में सत्ता संतुलन बदलता दिख रहा है जहां IRGC का प्रभाव बढ़ गया है. इससे कूटनीति कमजोर हुई है और होर्मुज में तनाव बढ़ने के साथ वैश्विक चिंता गहराती जा रही है.
नई दिल्ली: ईरान से सामने आ रही ताजा खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है. देश के भीतर सत्ता का समीकरण तेजी से बदलता नजर आ रहा है, जहां सैन्य ताकत का प्रभाव कूटनीति पर भारी पड़ता दिख रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का दखल अब निर्णायक हो गया है. इसका असर न केवल ईरान की आंतरिक राजनीति पर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल रहा है, खासकर समुद्री मार्गों और शांति वार्ताओं पर.
हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान की सैन्य और कूटनीतिक दिशा अब IRGC के प्रभाव में है. मेजर जनरल अहमद वाहिदी का नाम इस बदलाव के केंद्र में बताया जा रहा है. कहा जा रहा है कि उन्होंने सैन्य फैसलों के साथ-साथ बातचीत की प्रक्रिया पर भी पकड़ मजबूत कर ली है. इस बदलाव को ईरान के शीर्ष नेतृत्व की मौन सहमति भी मिलती नजर आ रही है.
कूटनीति पर सख्त रुख
इस बदलाव के बाद ईरान की कूटनीतिक नीति में भी सख्ती देखी जा रही है. जहां पहले बातचीत के जरिए समाधान की कोशिशें दिख रही थीं, अब रुख ज्यादा आक्रामक हो गया है. अमेरिका के साथ प्रस्तावित वार्ताओं को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ गई है. इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान फिलहाल दबाव में झुकने के मूड में नहीं है.
होर्मुज में बढ़ता तनाव
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार इस अहम समुद्री मार्ग पर गतिविधियां प्रभावित हुई हैं. कुछ जहाजों को निशाना बनाए जाने की खबरों से क्षेत्र में डर का माहौल है. यह मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में यहां तनाव बढ़ना पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है.
आंतरिक मतभेद उभरे
ईरान के भीतर भी अलग-अलग धड़े सामने आते दिख रहे हैं. कुछ नेता जहां नरम रुख अपनाने की बात कर रहे थे, वहीं सख्त रुख वाले गुट ने उन्हें चुनौती दी है. इसका असर यह हुआ कि बातचीत से जुड़े प्रयास धीमे पड़ गए. इससे साफ है कि देश के भीतर भी नीति को लेकर मतभेद मौजूद हैं.
भविष्य को लेकर आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में तनाव और बढ़ सकता है. अगर बातचीत आगे नहीं बढ़ी तो टकराव गहरा सकता है. युद्धविराम की स्थिति भी कमजोर बताई जा रही है. ऐसे में आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है.