'ईरान-अमेरिका के बीच समझौता फाइनल होने ही वाला था लेकिन...', ईरानी विदेश मंत्री ने बताया क्यों फेल हो गई शांति वार्ता?
ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने अमेरिका और ईरान के बीच असफल हुए शांति वार्ता के पीछे का कारण बताते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर किया है. उन्होंने इसके पीछे अमेरिका की गलती बताई है.
अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ता 21 घंटे तक चली. हालांकि इसके बाद भी दोनों देशों के बीच समझौता नहीं हो पाया. ईरानी नेतृत्व ने इस असफलता के लिए अमेरिका की शिफ्टिंग गोलपोस्ट नीति को जिम्मेदार ठहराया है.
ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया ने इस वार्ता से जुड़ी अहम जानकारी साझा की. उन्होंने कहा कि पिछले 47 सालों में दोनों देशों के बीच यह उच्चतम स्तर पर सबसे गहन और सीधा संवाद था. अराघची के अनुसार, ईरान युद्ध समाप्त करने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए पूरी ईमानदारी से आगे बढ़ा था.
ईरानी विदेश मंत्री ने बताया क्या हुआ?
अराघची ने कहा कि दोनों पक्ष इस्लामाबाद एमओयू पर हस्ताक्षर करने के बेहद निकट पहुंच गए थे, लेकिन ठीक उसी समय अमेरिका ने अपनी मांगों को अचानक बढ़ा दिया और शर्तों में बदलाव कर दिया. अराघची ने अफसोस जताते हुए लिखा कि जब समझौता फाइनल होने ही वाला था, तभी अमेरिका ने अपनी पुरानी रणनीति अपना ली.
उन्होंने अमेरिका पर निशाना साधते हुए लिखा कि इस देश ने इतिहास से कोई सबक नहीं लिया है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सद्भावना के बदले सद्भावना मिलती है, लेकिन दुश्मनी के बदले दुश्मनी ही हाथ लगती है. उन्होंने अमेरिका की मैक्सिमलिस्ट सोच बताते हुए उसकी आलोचना की और आरोप लगाया कि बातचीत में ईरान ने जितना भी लचीलापन दिखाया, अमेरिका उतना ही अधिक लाभ चाहता रहा.
ईराना और अमेरिका के अलग बयान
ईरानी विदेश मंत्री अराघची के अनुसार, अमेरिका वह मांगे रख रहा था जो वह युद्ध के मैदान में हासिल नहीं कर सका, अब उन्हें बातचीत की मेज पर हासिल करना चाहता था. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर अमेरिकी सरकार अपनी तानाशाही वाली मानसिकता को छोड़ दे और ईरानी राष्ट्र के वैध अधिकारों का सम्मान करे, तो समझौता करना कोई कठिन काम नहीं है.
पेजेशकियान ने अपनी वार्ता टीम की सराहना की और संसद अध्यक्ष डॉ. गालिबाफ करते हुए कहा कि टीम ने ईरान के हितों की बेहतरीन तरीके से रक्षा की. ईरानी पक्ष के अनुसार, सबसे बड़ी बाधा अमेरिका का बार-बार शर्तें बदलने का रवैया था. हालांकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने कहा था कि ईरान ने उनकी शर्तें स्वीकार नहीं किया. दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी के कारण यह समझौता नहीं हो पाया और अभी भी जंग जारी है.
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