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India Daily

'होर्मुज हमारा इलाका है', ईरान के खतरनाक जवाब देने की कसम खाने पर ट्रंप ने दी ये चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र बताया है और ईरान पर नए कड़े प्रतिबंधों की तैयारी की है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
'होर्मुज हमारा इलाका है', ईरान के खतरनाक जवाब देने की कसम खाने पर ट्रंप ने दी ये चेतावनी
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर गहराता जा रहा है. अमेरिका की ओर से ईरान पर इतिहास के सबसे कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी के बीच तेहरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी नए अमेरिकी खतरे का जवाब बेहद कड़ा और तबाही मचाने वाला होगा. 

इस टकराव का सीधा असर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ रहा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है.

अमेरिकी वित्त मंत्री ने क्या कहा?

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि सोमवार को ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों की जानकारी दी जाएगी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन देशों को भी आर्थिक कार्रवाई की चेतावनी दी है, जो ईरान को किसी भी तरह की आर्थिक मदद या सहारा देते हैं.

ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दोल्लाही ने कहा कि ईरान जमीन, समुद्र, हवा, एयर डिफेंस और साइबर क्षेत्र में पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा कि नए खतरे मिलने पर ईरानी सेना दुश्मन को करारा और तबाही मचाने वाला जवाब देगी.

ट्रंप ने हॉर्मुज को लेकर क्या कहा?

ट्रंप ने कहा कि ईरान अभी सही समझौते के लिए तैयार नहीं है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका का पूरे हॉर्मुज क्षेत्र पर नियंत्रण है. ट्रंप ने कहा, 'मैं हॉर्मुज जलडमरूमध्य को अभी अमेरिकी क्षेत्र मानता हूं.'

उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. ट्रंप के अनुसार अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए पहले भी कार्रवाई कर चुका है.

ईरान पर कड़े प्रतिबंधों को लेकर क्या है तैयारी?

बेसेंट ने अमेरिकी रणनीति को आर्थिक दबाव की नई मुहिम बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका नाकेबंदी के साथ इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाएगा. उनका दावा है कि इन कदमों का उद्देश्य ईरानी शासन को कमजोर करना है.

ईरान के सबसे बड़े समुद्री तेल खरीदार चीन ने अमेरिकी नीति पर आपत्ति जताई है. चीन ने कहा है कि प्रतिबंध और दबाव समस्या का समाधान नहीं करते और बातचीत का रास्ता अपनाया जाना चाहिए.

ईरान की अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ा असर?

ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है. मौजूदा तनाव के बीच महंगाई, कमजोर मुद्रा, ऊर्जा संकट और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान ने उसकी आर्थिक मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने भी माना कि देश पर आर्थिक दबाव गंभीर है. उन्होंने कहा कि केवल सैन्य ताकत से देश नहीं चल सकता और आर्थिक विकास, उत्पादन तथा लोगों की जरूरतों को पूरा करना जरूरी है.

हॉर्मुज से तेल आपूर्ति पर संकट

हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. युद्ध से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल व्यापार इस रास्ते से होता था. तनाव बढ़ने के बाद यहां जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आई है.