नई दिल्ली: आज बीयर और शराब को अक्सर सामाजिक मेलजोल, जश्न और मनोरंजन से जोड़कर देखा जाता है लेकिन इंसानों का फरमेंटेड पेय से रिश्ता हजारों साल पुराना है. पुरातात्विक खोजों से पता चलता है कि मानव समाज करीब 13,000 साल पहले ही बीयर जैसे पेय तैयार करना शुरू कर चुका था. वहीं अंगूर से बनी वाइन के प्रमाण करीब 8,000 साल पुराने मिले हैं.
इंसानों द्वारा बनाई गई बीयर के सबसे पुराने प्रमाण इजराइल के हाइफा के पास स्थित राकफेट गुफा से मिले हैं. यह गुफा नटुफियन समाज के लोगों का प्राचीन दफन स्थल थी. यहां मिले पत्थरों और बर्तनों के अवशेषों के अध्ययन से पता चला कि करीब 11,000 ईसा पूर्व लोग अनाज से फरमेंटेड पेय तैयार करते थे.
शोधकर्ताओं के अनुसार उस दौर की बीयर आज मिलने वाली बीयर जैसी बिल्कुल नहीं थी. यह गाढ़े अनाज के घोल या दलिया जैसी होती थी. इसे बनाने के लिए अनाज को पानी में मिलाकर फरमेंट किया जाता था.
साल 2018 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार नटुफियन समुदाय बीयर का इस्तेमाल मुख्य रूप से धार्मिक अनुष्ठानों और मृत पूर्वजों की याद में आयोजित भोज में करता था. इसका मतलब है कि शराब बनाने की परंपरा खेती के पूरी तरह विकसित होने से पहले ही शुरू हो चुकी थी.
बीयर उस समय केवल नशे या मनोरंजन का साधन नहीं थी. इसका सामाजिक और धार्मिक महत्व भी था. लोग विशेष अवसरों पर इसे बनाकर आपस में बांटकर पीते थे.
अंगूर से बनाई गई वाइन के सबसे पुराने प्रमाण जॉर्जिया में मिले हैं. राजधानी त्बिलिसी के आसपास स्थित पुरातात्विक स्थलों से करीब 5,980 ईसा पूर्व के बड़े मिट्टी के बर्तन मिले थे. इन बर्तनों में टार्टरिक एसिड के अवशेष पाए गए.
टार्टरिक एसिड अंगूर में पाया जाने वाला प्रमुख एसिड है. इसके अवशेषों ने वैज्ञानिकों को यह पता लगाने में मदद की कि इन बर्तनों में अंगूर की वाइन बनाई और रखी जाती थी.
जॉर्जिया में मिले प्रमाण यह भी बताते हैं कि उस दौर में वाइन केवल राजा या अमीर लोगों तक सीमित नहीं थी. स्थानीय किसान भी अंगूर से वाइन बनाते थे. कुछ बर्तनों पर अंगूर और नाचते हुए लोगों की आकृतियां भी मिली हैं.
इससे पता चलता है कि हजारों साल पहले भी वाइन सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा थी यानी इंसानों ने आधुनिक शराब उद्योग शुरू होने से हजारों साल पहले ही अनाज और अंगूर से फरमेंटेड पेय बनाने की कला सीख ली थी.