इजरायल और तुर्की के बीच सीरिया को लेकर तनाव लगातार गहराता जा रहा है. इजरायल के दक्षिणपंथी अखबार इजरायल हायोम में प्रकाशित एक लेख ने इस तनाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है. लेख में कहा गया है कि यदि तुर्की अपनी सेना को सीरिया में तैनात करता है, तो इजरायल के पास वहां मौजूद तुर्की सैन्य ठिकानों या जवानों को निशाना बनाने का रास्ता खुला रह सकता है.
हालांकि, यह किसी सरकारी नीति की घोषणा नहीं, बल्कि अखबार में प्रकाशित एक राय है. इसलिए इसे इजरायल सरकार का आधिकारिक रुख नहीं माना जा सकता. लेकिन इसे लेकर अब चर्चा होनी शुरू हो गई है.
लेख में NATO के आर्टिकल-5 का हवाला देते हुए कहा गया है कि सामूहिक रक्षा का यह प्रावधान सदस्य देशों के अपने क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़ा है. तर्क यह है कि अगर तुर्की की सेना सीरिया में तैनात होती है, तो सीरिया की जमीन तुर्की का राष्ट्रीय क्षेत्र नहीं बन जाएगी. ऐसी स्थिति में वहां तुर्की के सैनिकों या सैन्य ढांचे पर हमला होने पर NATO की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था स्वतः लागू होगी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है. किसी संभावित हमले के बाद NATO किस तरह प्रतिक्रिया देगा, इसका फैसला परिस्थितियों और सदस्य देशों की सहमति पर निर्भर करेगा.
इजरायल की चिंता की बड़ी वजह सीरिया में तुर्की का बढ़ता सैन्य प्रभाव है. रिपोर्टों के अनुसार, तुर्की सीरियाई सेना को प्रशिक्षण देने और उसकी सैन्य क्षमता मजबूत करने में सहयोग कर रहा है. वर्ष 2025 में तुर्की की सैन्य टीमों द्वारा T4, पलमायरा और हमा जैसे ठिकानों का निरीक्षण किए जाने की बात भी सामने आई थी. इसी बीच इजरायल ने उत्तरी सीरिया के एक पुराने हवाई अड्डे पर हमला किया था.
इजरायल को आशंका थी कि वहां तुर्की की सेना तैनात हो सकती है. हालांकि, सीरियाई अधिकारियों ने तुर्की की सैन्य मौजूदगी से इनकार करते हुए कहा था कि वहां केवल रनवे और नियंत्रण टावर की मरम्मत के लिए तकनीकी टीम पहुंची थी. इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका भी दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है. फिलहाल इजरायल और तुर्की सीधे युद्ध की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन सीरिया में दोनों का बढ़ता सैन्य प्रभाव टकराव की आशंका जरूर बढ़ा रहा है.