क्या ईरान और अमेरिका के बीच फिर शुरू होगी बातचीत? IAEA चीफ के बड़े बयान से जगी उम्मीद
इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसीके डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी ने ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को लेकर एक बड़ा बयान दे दिया है...
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है. इस बार ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर बातचीत का रास्ता खुलता नजर आ रहा है. यह तब हुआ जब ईरान पूरी तरह अटैक मोड पर चला गया है और इजरायल-अमेरिका भी पीछे हटने का नाम नहीं ले रहे हैं.
इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसीके डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी ने अपने बयान से पूरे विश्व के लोगों में इस उम्मीद की किरण को उजागर किया. उन्होंने यह अहम उम्मीद जताई है कि दोनों महाशक्तियों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर रुकी हुई वार्ता जल्द ही दोबारा शुरू हो सकती है. वैश्विक तनाव और संकट के इस माहौल में ग्रॉसी का यह बयान दुनिया के लिए एक नई रोशनी दिखाता है.
व्हाइट हाउस और ईरान से हुआ संपर्क
इस बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम का खुलासा आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने एक विशेष साक्षात्कार में किया है. अपने इस बयान में ग्रॉसी ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए अमेरिका के व्हाइट हाउस में कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण चर्चाएं की है. साथ ही उनकी ईरानी अधिकारियों से भी बात हुई है. दोनों देशों के बीच बने इन नए संपर्कों की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ बुनियादी संपर्क स्थापित हो चुके हैं. उन्हें इस बात की पूरी उम्मीद है कि बातचीत की इस अहम लाइन को फिर से सुचारू रूप से शुरू किया जा सकेगा.
क्या किसी नए समझौते की है संभावना?
जानकारों की नजर इस बात पर है कि क्या यह संवाद किसी नतीजे तक पहुंचेगा. जब आईएईए प्रमुख से सीधे तौर पर यह सवाल किया गया कि क्या भविष्य में दोनों देशों के बीच किसी कूटनीतिक समझौते की कोई संभावना नजर आ रही है, तो उनका जवाब बेहद स्पष्ट और सकारात्मक था. इस पर ग्रॉसी ने कहा कि जब भी दो पक्षों के बीच बातचीत होती है, तो वहां हमेशा किसी न किसी समझौते पर पहुंचने की प्रबल संभावना बनी रहती है.
डोनाल्ड ट्रंप का रुख
इस पूरी शांति प्रक्रिया में अमेरिकी नेतृत्व के रुख को लेकर भी ग्रॉसी ने स्थिति साफ की. उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनकी सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप से कोई बात नहीं हुई है, लेकिन उन्हें इस बात की भली-भांति जानकारी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति हमेशा से कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करते हैं.