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2 महीने से गायब हैं ईरान के सुप्रीम लीडर! AI पोस्टरों ने बढ़ाया सस्पेंस, आखिर जिंदा हैं या नहीं?

अमेरिका-ईरान के बीच जंग अभी खत्म नहीं हुई है, लेकिन किसी बात पर समझौता भी नहीं हो पा रहा है. ऐसे में मोजतबा खामेनेई की गैर-मौजूदगी ने वार्ताकारों की टेंशन बढ़ा दी है.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई पर सस्पेंस बना हुआ है. अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद मोजतबा को उनकी जगह बैठाया गया था लेकिन दो महीने से ज्यादा गुजर जाने के बाद भी वे जनता के सामने नहीं आए हैं. यही कारण है कि जनता अब उनके जिंदा रहने पर शक कर रही है. सोशल मीडिया पर चल रहे खामेनेई के पोस्टर भी एआई जनरेटेड बताए जा रहे हैं. हालांकि ईरान के राष्ट्रपति ने खामेनेई के साथ बैठक की पुष्टि की है इसके बाद भी जनता को भरोसा नहीं हो रहा है.

अमेरिकी हमले में गंभीर घायल हुए थे खामेनेई

ईरान और अमेरिका दोनों ही देशों के अधिकारियों ने ये बताया है कि 28 फरवरी को अमेरिकी हमले में मोजतबा गंभीर रूप से घायल हो गए थे. और तब ही से वो जनता के सामने नहीं आ सके हैं. वहीं जंग को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच लगातार बातचीत चल रही है ऐसे में मोजतबा की गैर-मौजूदगी वहां के शासन पर सवाल खड़े कर रही हैं. मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि ईरान की सड़कों पर खामेनेई के बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं. इसके साथ ही उनके एक्स अकाउंट से लगातार पोस्ट भी किए जा रहे हैं. लेकिन इन पोस्टर और तस्वीरों को एआई से बनाई गई माना जा रहा है.

समर्थकों को अधिकारियों पर शक

येल यूनिवर्सिटी के इतिहासकार अरशद अजीजी ने इस पूरे मामले पर कहा है कि मोजतबा की गैर-मौजूदगी उनके कट्टर समर्थकों में परेशानी बढ़ा रही है. मोजतबा के बिना अमेरिका से डील पर समर्थक सवाल खड़े कर रहे हैं. समर्थकों को इस बात का डर सता रहा है कि मोजतबा की गैर-मौजूदगी में ईरानी अधिकारी अमेराक को ज्यादा रियायत दे रहे हैं. इसके साथ ही मोजतबा के न होने से सरकार में आपसी मतभेज भी होने की खबर है,

समर्थकों ने मोजतबा से की मांग

मोजतबा खामेनेई की गैर-मौजूदगी से कट्टरपंथी गुट उदारवादी नेता और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ पर आरप लगा रहे हैं. कट्टरपंथी गुट का मानना है कि गालिबाफ ट्रंप के आगे घुटने टेक रहे हैं. इसी के चलते समर्थकों ने सोशल मीडिया पर मांग की है कि मोजतबा कम से कम अपनी आवाज में एक वॉइस मैसेज ही रिलीज कर दें जिससे समर्थकों क उनके जिंदा होने और अमेरिकी डील में उनकी सहमति पर भरोसा हो सके.