'सरासर झूठ बोल रहे....', अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर ईरान का जवाब

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ सयम पहले यह दावा किया कि अमेरिका के सेना द्वारा हमला किए जाने के बाद ईरान ने उन्हें फोन किया. उनके इस दावे पर ईरान की प्रतिक्रिया सामने आई है.

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Shanu Sharma

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मिडिल ईस्ट संकंट शुरू होने के बाद से न जाने कितने दावे कर चुके हैं. सबसे नए दावे में उन्होंने कहा कि ईरानी नेताओं ने उनसे सीधे संपर्क कर हमले रोकने की अपील की, जबकि ईरान ने इसे पूरी तरह झूठ बताया  है. 

ईरान की ओर से कहा गया कि दोनों पक्षों के बीच कोई संपर्क नहीं हुआ है. अमेरिकी हमले और ईरान संपर्क को लेकर यह विरोधाभासी बयानबाजी ऐसे समय सामने आई है जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच संभावित समझौते की चर्चा भी जारी है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका समझौते के करीब है, लेकिन शर्तें न मानी गईं तो और कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

ट्रंप का सार्वजनिक संदेश

फॉक्स न्यूज के साथ बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान पर 49 टॉमहॉक मिसाइलें दागी गईं और यदि अमेरिका की शर्तें स्वीकार नहीं की गईं तो अगले चरण में और अधिक तीव्र बमबारी की जाएगी.  ईरान के सरकारी और सैन्य सूत्रों ने ट्रंप के दावे को तुरंत खारिज किया. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का यह कहना कि ईरानी अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया है, पूरी तरह गलत है. ईरानी पक्ष ने संकेत दिया कि वह अमेरिकी कार्रवाई का सैन्य जवाब देगा और दबाव में बातचीत स्वीकार नहीं करेगा. ईरान के संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने भी कहा कि यदि अमेरिका वास्तव में समझौता चाहता है तो उसे बल प्रयोग की धमकियों से बचना चाहिए. उनके अनुसार, ईरान धमकी और दबाव के माहौल में बातचीत नहीं करेगा.


ईरान ने क्या कहा?

ईरान ने कहा कि अब्बास, मिनाब, सिरिक, करगन और केशम द्वीप समेत कई स्थानों पर धमाकों की आवाजें सुनी गईं. जवाबी कार्रवाई के रूप में कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही गई. दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बयान देकर कहा कि उसने ईरान में सैन्य निगरानी, संचार प्रणालियों और वायु रक्षा से जुड़े ठिकानों पर अतिरिक्त आत्मरक्षा हमले किए हैं. अमेरिकी सेना ने यह भी कहा कि उसके अभियान क्षेत्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी बलों की सुरक्षा के लिए थे. ईरान ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया गया है और अमेरिकी पांचवें बेड़े को निशाना बनाया गया है. अमेरिकी सेना ने इन दावों का खंडन किया.