'हमें युद्धविराम नहीं, युद्ध का स्थायी अंत चाहिए', ईरान ने ठुकराया US का प्रस्ताव; पाक के जरिए दिया जवाब
ईरान ने अमेरिका के 45 दिनों के युद्धविराम प्रस्ताव को आधिकारिक तौर पर ठुकराते हुए 'युद्ध के स्थायी अंत' की मांग की है. तेहरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अपना 10-सूत्रीय जवाबी ढांचा पेश किया है, जिसमें प्रतिबंधों को हटाने और परमाणु अधिकारों की बहाली जैसी शर्तें शामिल हैं.
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है. सोमवार को ईरानी राज्य समाचार एजेंसी (IRNA) ने खुलासा किया कि तेहरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को अपना जवाब भेज दिया है. ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह किसी अस्थायी युद्धविराम के पक्ष में नहीं है, बल्कि वह "युद्ध के पूर्ण और स्थायी अंत" की दिशा में प्रतिबद्धता चाहता है.
ईरान द्वारा पेश किया गया जवाब महज एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि 10 बिंदुओं वाला एक विस्तृत ढांचा है. तेहरान की मांग है कि युद्ध केवल उसकी सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि लेबनान और गाजा में भी स्थायी रूप से समाप्त होना चाहिए. इसके अलावा, ईरान ने भविष्य में हमले न होने की पुख्ता गारंटी मांगी है. रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' पर भी ईरान ने अपना दावा मजबूत किया है. तेहरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को विनियमित करने और टोल टैक्स वसूलने के अधिकार की औपचारिक मान्यता मांगी है.
प्रतिबंधों की समाप्ति और परमाणु अधिकार
ईरान ने अपनी अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की मांग रखी है. परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार की औपचारिक स्वीकृति और युद्ध के कारण हुए आर्थिक नुकसान के लिए मुआवजे की मांग भी इस प्रस्ताव का अहम हिस्सा है. काहिरा में ईरानी राजनयिक मिशन के प्रमुख मोजतबा फिरदौसी पोर ने स्पष्ट किया, 'हम केवल युद्धविराम को स्वीकार नहीं करेंगे. हम केवल उन गारंटियों के साथ युद्ध का अंत स्वीकार करेंगे कि हम पर दोबारा हमला नहीं होगा.'
ट्रंप की समय सीमा और अमेरिका का कड़ा रुख
यह घटनाक्रम राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ईरान के ऊर्जा और बुनियादी ढांचे पर बमबारी की दी गई समय सीमा से ठीक पहले सामने आया है. ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा कि उनके पास कई विकल्प हैं और वे पीछे हटने के मूड में नहीं हैं. ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को युद्ध के नुकसान से उबरने में वर्षों लग जाएंगे, लेकिन वे इसे अब 'खत्म' करना चाहते हैं. ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सकता, हालांकि तेहरान हमेशा से इन दावों को खारिज करता आया है.
मध्यस्थों की सक्रियता
बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभर रहा है. पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की के साथ मिलकर ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के बीच सीधे संदेशों का आदान-प्रदान सुगम बना रहा है. व्हाइट हाउस ने इसे कई विचाराधीन विचारों में से एक बताया है, लेकिन फिलहाल अमेरिका का सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' जारी है.
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