नई दिल्ली: ईरान में आर्थिक संकट से शुरू हुआ जन आंदोलन अब देश के सबसे घातक विरोध प्रदर्शनों में बदल चुका है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक करीब 5000 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें सुरक्षा बलों के सैकड़ों जवान भी शामिल हैं. सरकार जहां हिंसा के लिए आतंकवादियों और विदेशी दुश्मनों को जिम्मेदार ठहरा रही है, वहीं मानवाधिकार संगठन मौतों और गिरफ्तारियों की संख्या कहीं अधिक बता रहे हैं. हालात को काबू में लाने के लिए सुरक्षा बलों ने सख्त कार्रवाई की है.
ईरान में यह विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को शुरू हुए थे. शुरुआत में लोग महंगाई, बेरोजगारी और गिरती अर्थव्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे. लेकिन कुछ ही दिनों में प्रदर्शन तेज होते चले गए. दो हफ्तों के भीतर आंदोलन ने राजनीतिक रूप ले लिया. कई शहरों में सरकार विरोधी नारे लगे और धार्मिक शासन को खत्म करने की मांग सामने आने लगी. इससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए.
एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रविवार को बताया कि अब तक 5000 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. इनमें लगभग 500 सुरक्षा कर्मी भी शामिल हैं. अधिकारी ने कहा कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने के लिए आतंकवादियों और सशस्त्र दंगाइयों को जिम्मेदार ठहराया गया है. सरकार का दावा है कि ये आंकड़े सत्यापित हैं और मृतकों की संख्या में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी.
अमेरिका स्थित एक मानवाधिकार संगठन ने दावा किया है कि उसने अब तक 3308 मौतों की पुष्टि की है, जबकि 4382 अन्य मामलों की जांच जारी है. संगठन का कहना है कि 24000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. ईरानी सरकार ने इन आंकड़ों को खारिज करते हुए कहा कि विदेशी संगठन हालात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं और इससे भ्रम फैलाया जा रहा है.
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल पर अशांति फैलाने का आरोप लगाया है. उन्होंने स्वीकार किया कि कई हजार लोग मारे गए हैं, लेकिन इसके लिए विदेशी दुश्मनों को जिम्मेदार ठहराया. सरकार का दावा है कि विदेशों से सशस्त्र समूहों को समर्थन और हथियार मुहैया कराए गए, जिससे हालात और बिगड़े.
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, सबसे ज्यादा हिंसक झड़पें उत्तर-पश्चिमी कुर्द बहुल इलाकों में हुईं. यहां लंबे समय से कुर्द अलगाववादी समूह सक्रिय हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ सशस्त्र समूहों ने इराक से ईरान में घुसपैठ की कोशिश की थी. नॉर्वे स्थित कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगाव ने भी पुष्टि की है कि कुर्द क्षेत्रों में हिंसा सबसे ज्यादा रही.
स्थानीय लोगों और सरकारी मीडिया के अनुसार, सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई के बाद विरोध प्रदर्शन काफी हद तक शांत हो गए हैं. हालांकि, इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं, जिससे जानकारी का प्रवाह सीमित हो गया है. इंटरनेट निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स के अनुसार, कुछ समय के लिए सेवाएं बहाल की गई थीं, लेकिन बाद में फिर बंद कर दी गईं. हालात फिलहाल नियंत्रण में बताए जा रहे हैं, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.