'US-इजरायल से नहीं रुकेगी जंग', ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन ने युद्ध खत्म करने के लिए रख दी ये 3 शर्तें

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा तनाव अपने दूसरे सप्ताह में पहुंच चुका है. जिसके कारण पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ना शुरू हो गया है.

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Shanu Sharma

मिडिल ईस्ट में चल रहा अब दूसरे हफ्ते में आ चुका है. इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस संघर्ष के कारण पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल चुकी है. तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, वैश्विक बाजारों में महंगाई का खतरा मंडरा रहा है. हालांकि इस जंग के खत्म होने की उम्मीद अभी भी बाकी है.

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पहली बार खुलकर युद्ध खत्म करने की शर्तें बताई हैं. उन्होंने कहा है कि युद्ध रोकने का एकमात्र रास्ता ईरान के वैध अधिकारों को मानना है. उन्होंने कहा कि इसके लिए युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और भविष्य में हमलों से बचाव के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय गारंटी देना होगा.

ईरान की क्या है 3 शर्तें?

राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से इस बात की घोषणा की. उन्होंने लिखा कि रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत में उन्होंने क्षेत्र में शांति के लिए ईरान की प्रतिबद्धता दोहराई. उनका कहना है कि जायनिस्ट शासन और अमेरिका द्वारा शुरू की गई इस जंग को खत्म करने का रास्ता ईरान के कानूनी अधिकारों को स्वीकार करना, हर्जाना देना और भविष्य में हमलों के खिलाफ पक्की गारंटी देना है. पेजेशकियन का दावा है कि इन मुद्दों पर ठोस समझौता नहीं हुआ तो युद्ध खत्म नहीं हो सकता. ईरान अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ संपर्क में है और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटा रहा है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ने बढ़ाई दुनिया की चिंता

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ता तनाव दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है. यह स्ट्रेट दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का रास्ता है. इन रास्तों पर ईरान द्वारा की गई समुद्री माइनिंग और सैन्य गतिविधियों से तेल टैंकरों की आवाजाही ठप हो गई है. ईरान की ओर से चेतावनी दी गई है कि हॉर्मुज से एक लीटर तेल भी नहीं गुजरने दिया जाएगा. कुछ रिपोर्टों में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर से ऊपर पहुंच चुका है. वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध का असर सिर्फ सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा. तेल की ऊंची कीमतें महंगाई को बढ़ावा देंगी. परिवहन, उद्योग और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं. खाड़ी देशों में तेल उत्पादन प्रभावित होने से वैश्विक आपूर्ति चेन बाधित हो रही है.