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ईरान ने दुबई के पास तेल टैंकर पर किया ड्रोन हमला, जवाब में अमेरिका ने समंदर में उतारा 'विनाशक' युद्धपोत

तेहरान द्वारा दुबई के निकट कुवैती तेल टैंकर 'अल-सल्मी' पर ड्रोन हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है. जवाब में अमेरिका ने हिंद महासागर में अपने घातक युद्धपोत 'यूएसएस ट्रिपोली' की तैनाती कर दी है, जिससे सैन्य टकराव की आशंका गहरा गई है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने अब एक विनाशकारी मोड़ ले लिया है. तेहरान ने मंगलवार को दुबई के तट के पास एक पूरी तरह से भरे हुए तेल टैंकर पर ड्रोन से हमला कर उसे आग के हवाले कर दिया. इस घटना ने वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर संकट पैदा कर दिया है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में यह सबसे ताजा और खतरनाक घटना है.

दुबई के अधिकारियों के अनुसार, कुवैत का झंडा लगे 'अल-सल्मी' जहाज पर ड्रोन हमले के बाद लगी आग को कड़ी मशक्कत के बाद काबू कर लिया गया है. राहत की बात यह रही कि इस हमले में तेल का कोई रिसाव नहीं हुआ और चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं. जहाज के मालिक 'कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन' ने पुष्टि की है कि हमले में टैंकर को भारी क्षति पहुंची है.

निगरानी सेवा 'टैंकर ट्रैकर्स डॉट कॉम' के आंकड़ों के मुताबिक, इस जहाज में 1.2 मिलियन बैरल सऊदी कच्चा तेल और 800,000 बैरल कुवैती कच्चा तेल लदा था, जो चीन के किंगदाओ की ओर जा रहा था. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उनका निशाना इजरायल से संबंधित सिंगापुर का एक जहाज 'हेफोंग एक्सप्रेस' था, लेकिन तकनीकी चूक या गलत पहचान के कारण 'अल-सल्मी' इसका शिकार बन गया.

अमेरिका की 'किलर' घेराबंदी: यूएसएस ट्रिपोली तैनात 

ईरान की इस गुस्ताखी के बाद अमेरिका ने अपनी सामरिक तैनाती तेज कर दी है. अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने पुष्टि की है कि उभयचर आक्रमण पोत 'यूएसएस ट्रिपोली' (USS Tripoli) को हिंद महासागर में उतार दिया गया है. 45,000 टन वजनी यह विशाल युद्धपोत लगभग 1,800 घातक नौसैनिकों के साथ क्षेत्र में नौवहन कर रहा है. हालांकि इसकी सटीक लोकेशन गुप्त रखी गई है, लेकिन इसे ईरान के खिलाफ संभावित जमीनी सैन्य अभियान की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है.

खार्ग द्वीप पर नजर और ईरान की आखिरी चेतावनी 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अमेरिकी सेना ईरान के 'खार्ग द्वीप' को निशाना बना सकती है. बता दें कि यह द्वीप ईरान के कुल तेल निर्यात का 90 प्रतिशत केंद्र है. इसके जवाब में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि किसी भी अमेरिकी सैनिक ने उनकी सरजमीं पर कदम रखने की कोशिश की, तो उसे नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा और वैश्विक ऊर्जा ढांचे पर हमले और तेज किए जाएंगे.