अमेरिका के बाद अब सऊदी अरब ने दिया झटका, अब भारतीयों को नहीं मिलेंगी ये चार नौकरियां
जनवरी 2025 से लागू किए गए नियमों के तहत, सऊदी अरब जाने वाले भारतीय श्रमिकों के लिए अपनी शैक्षणिक और पेशेवर डिग्रियों का पहले सत्यापन करना अनिवार्य कर दिया गया है.
वीजा और नौकरी को लेकर अमेरिका द्वारा विदेशी नागरिकों को झटका देने के बाद अब सऊदी अरब ने भी अपनी विजन 2030 नीति के तहत नौकरी और वर्क वीजा नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है. इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य स्थानीय नागरिकों को प्राथमिकता देना और वर्कफोर्स की क्वालिटी को बढ़ाना है. सऊदी के नए नियमों के मुताबिक, अब देश की चार प्रमुख नौकरियों में केवल सऊदी के नागरिकों को आरक्षित किया गया है.
अब जनरल मैनेजर, सेल्स प्रतिनिधि, मार्केटिंग स्पेशलिस्ट और प्रोक्योरमेंट मैनेजर की पोस्ट पर सऊदी अरब के लोगों को ही नौकरी पर रखना अनिवार्य होगा. किसी विदेशी को इन पदों पर नौकरी नहीं मिलेगी. वहीं जो प्रवासी पहले से जनरल मैनेजर पदों पर कार्यरत थे उन्हें सख्त शर्तों के साथ सीईओ या चेयरमैन जैसे वैकल्पिक पदनाम अपनाने की सलाह दी गई है.
वहीं सेल्स रिप्रेजेंटेटिव पदों के मामले में कहा गया है कि इन पदों पर अब सऊदी कर्मचारियों की संख्या बढ़ानी अनिवार्य होगी. वहीं मार्केटिंग स्पेशलिस्ट पदों पर कम से कम 60 प्रतिशत सऊदी नागरिकों की नियुक्ति करनी होगी. सप्लाई चेन पर स्थानीय नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए प्रोक्योरमेंट मैनेजर का पद भी सऊदी नागरिकों के लिए आरक्षित किया गया है.
न्यूनतम वेतन भी तय किया गया
नए नियमों के तहत सेल्स और मार्केटिंग विभाग में काम करने वाले सऊदी कर्मचारियों को कम से कम 5,500 सऊदी रियाल प्रति माह वेतन देना होगा. वहीं तकनीकी और इंजीनियरिंग जैसे पदों पर काम करने वाले लोगों को प्रति माह 8000 रियाल प्रति माह देने होंगे. नियमों के मुताबिक, अगर कंपनियां इन शर्तों को पूरा नहीं करतीं तो कर्मचारियों को स्थानीयकरण कोटे में नहीं गिना जाएगा.
प्रवासियों पर क्या होगा असर
इन बदलावों का सीधा असर प्रवासियों पर होगा. अब कुछ पदों पर प्रवासियों के लिए नया वर्क वीजा जारी नहीं किया जाएगा. नौकरी बदलने के बाद भी पदनाम बदलना संभव नहीं होगा. सरकार ने कंपनियों को तीन महीने की मोहलत दी है ताकि वे नए नियमों के अनुसार अपने आपको ढाल सकें.
भारतीयों के लिए अनिवार्य योग्यता सत्यापन
जनवरी 2025 से लागू किए गए नियमों के तहत, सऊदी अरब जाने वाले भारतीय श्रमिकों के लिए अपनी शैक्षणिक और पेशेवर डिग्रियों का पहले सत्यापन करना अनिवार्य कर दिया गया है. सऊदी श्रम मंत्री अहमद-रजही ने कहा कि यह फैसला केवल नौकरियों की संख्या बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि सऊदी नागरिकों को नेतृत्व और निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में लाने के लिए किया गया है. सरकार चाहती है कि निजी क्षेत्र की कमान धीरे-धीरे देश के युवाओं के हाथों में जाए और विदेशी निर्भरता कम हो. सरकार का यह फैसला बताता है कि आने वाले समय में सऊदी अरब में प्रवासियों के लिए अवसर सीमित हो सकते हैं.