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भारत के कहर से कैसे बचे पाकिस्तान, लंदन से लौट नवाज शरीफ ने भाई शहबाज को बताया प्लान, क्या पाक PM मानेंगे बात?

भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे बनते माहौल के बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ लंदन से वापस पाकिस्तान लौटे हैं. जिसके बाद उन्होंने अपने छोटे भाई और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भारत के साथ इस संघर्ष को खत्म करने पर चर्चा की है.

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Shanu Sharma

Nawaz Sharif about India Pakistan Tension: जम्मू कश्मीर के पहलगाम हमले (26 लोगों की मौत) के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है. पहलगाम हमले के 15 दिनों बाद बुधवार तड़के भारतीय सेना ने पाकिस्तान के नौ आतंकी ठिकानों पर हमला कर दिया. जिसके बाद पाकिस्तान की ओर से गुरुवार को गोलीबारी की गई और मिसाइलें भी दागी गई. इसी बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ अपने भाई को और अपने देश को इस संकट से निकालने के लिए लंदन से वापस पाकिस्तान लौट आए हैं. 

नवाज ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) की बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी लेने के बाद कूटनीतिक रास्तों से तनाव कम करने की सलाह दी. उन्होंने पीएमएल-एन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार से दोनों परमाणु-सशस्त्र देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए सभी राजनयिक संसाधनों का उपयोग करने का आग्रह किया. नवाज ने आक्रामक रुख अपनाने से इनकार करते हुए शांति पर जोर दिया. 

नवाज का ऐतिहासिक दृष्टिकोण

नवाज शरीफ ने 2023 में भारत के साथ सौहार्दपूर्ण संबंधों के महत्व को रेखांकित किया था. उन्होंने दावा किया था कि 1999 में उनकी सत्ता को इसलिए खत्म कर दिया क्योंकि उन्होंने कारगिल युद्ध का विरोध किया था. 'द न्यूज इंटरनेशनल' के अनुसार नवाज ने कहा कि मैं जानना चाहता हूं कि 1993 और 1999 के दौरान मेरी सरकार क्यों गिराई गई. क्या यह इसलिए कि हमने कारगिल युद्ध का विरोध किया? बता दें कि 21 फरवरी 1999 को लाहौर घोषणा हुई थी, जिसके बाद 12 अक्टूबर 1999 को शहवाज शरीफ की सरकार को सत्ता से उखाड़ दिया गया.

लाहौर घोषणा और कारगिल युद्ध

नवाज ने पिछले साल स्वीकार किया था कि पाकिस्तान ने 1999 में भारत के साथ हुए समझौते का उल्लंघन किया. उन्होंने कहा कि 1998 में पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण किए. इसके बाद वाजपेयी जी आए और हमने लाहौर घोषणा पर हस्ताक्षर किए. लेकिन हमने उसका उल्लंघन किया, यह हमारी गलती थी. भारत-पाकिस्तान के बीच लाहौर घोषणा 21 फरवरी 1999 के दिन किया गया था. जिसमें नवाज शरीफ और भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजयपेयी के बीच समझौता हुआ, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच शांति लाना था. हालांकि इस समझौते के बाद ही पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा कारगिल में घुसपैठ की गई. जिसकी वजह से कारगिल युद्ध हुआ.