नई दिल्ली: भारत आज वैश्विक कूटनीति के केंद्र में खड़ा है. नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक आयोजित की जा रही है. यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि 10 साल के लंबे अंतराल के बाद यह मंच दोबारा सक्रिय हुआ है और पहली बार इसकी मेजबानी भारत कर रहा है. पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के 22 देशों की भागीदारी ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया है.
भारत और अरब देशों के बीच विदेश मंत्रियों की पहली बैठक साल 2016 में बहरीन में हुई थी. इसके बाद एक दशक तक यह मंच ठहरा रहा. अब दूसरी बैठक भारत में आयोजित होना इस बात का संकेत है कि भारत और अरब वर्ल्ड के रिश्ते नई ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं. भारत और अरब संवाद को साल 2002 में समझौते के जरिए औपचारिक रूप मिला था और 2008 में अरब इंडिया को ऑपरेशन फोरम की शुरुआत हुई थी.
इस अहम बैठक की सह अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात कर रहे हैं. यह अपने आप में भारत और खाड़ी देशों के मजबूत रिश्तों को दर्शाता है. बैठक से पहले सभी विदेशी प्रतिनिधियों की मुलाकात नरेंद्र मोदी से होनी है. इससे साफ है कि भारत इस मंच को कितनी गंभीरता से ले रहा है.
इस बैठक में फिलिस्तीन, सऊदी अरब, ओमान, सूडान, सोमालिया, लीबिया और कोमोरोस जैसे देशों के विदेश मंत्री खुद शामिल हो रहे हैं. वहीं मिस्र, कतर, यमन और यूएई की ओर से राज्य मंत्री या उप विदेश मंत्री स्तर के नेता पहुंचे हैं. इसके अलावा इराक, सीरिया, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन और लेबनान जैसे देशों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस बैठक का हिस्सा बने हैं.
पहली बैठक में भारत और अरब देशों ने सहयोग के पांच प्रमुख क्षेत्र तय किए थे. इनमें अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति शामिल थे. इस बार बैठक में इन्हीं क्षेत्रों को और मजबूत करने पर चर्चा हो रही है. खास तौर पर व्यापार और निवेश को लेकर बड़े फैसलों की उम्मीद है. भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और अरब देशों के संसाधनों के बीच यह साझेदारी दोनों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है.
आज की बैठक में सिर्फ आर्थिक सहयोग ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा हो रही है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने की कोशिश की जा रही है. भारत का उद्देश्य साफ है कि वह एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभरे और स्थिरता में अपनी भूमिका निभाए.
अरब वर्ल्ड के साथ भारत की बढ़ती नजदीकियां पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय बन गई हैं. कभी जिन देशों को पाकिस्तान अपना पारंपरिक समर्थक मानता था, वही आज भारत के साथ एक मंच पर खड़े नजर आ रहे हैं. कूटनीतिक जानकार मानते हैं कि यह भारत की संतुलित विदेश नीति और मजबूत नेतृत्व का नतीजा है.
यह बैठक भारत की वेस्ट एशिया नीति के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है. अरब लीग में भारत की पर्यवेक्षक की भूमिका और अब इस स्तर की मेजबानी यह दिखाती है कि भारत को क्षेत्र में गंभीर खिलाड़ी के रूप में देखा जा रहा है. आने वाले समय में इसका असर व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी पर साफ नजर आएगा.