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'मैं इसकी गारंटी नहीं दे सकता कि हर देश...', भारत-मालदीव विवाद पर जयशंकर ने तोड़ी चुप्पी

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में मालदीव के साथ चल रहे राजनयिक विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती कि हर देश हर समय भारत का समर्थन करेगा या उससे सहमत होगा.

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Avinash Kumar Singh
External affairs minister S Jaishankar

हाइलाइट्स

  • भारत-मालदीव विवाद पर जयशंकर ने तोड़ी चुप्पी
  • 'अन्य देशों में बुनियादी ढांचे के विकास में भारत की भागीदारी'

नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में मालदीव के साथ चल रहे राजनयिक विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती कि हर देश हर समय भारत का समर्थन करेगा या उससे सहमत होगा. नागपुर में एक टाउनहॉल बैठक में मालदीव के साथ हालिया मतभेद के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा कि राजनीति तो राजनीति है, मैं इसकी गारंटी नहीं दे सकता कि हर देश में हर दिन हर कोई हमारा समर्थन करेगा या हमसे सहमत होगा.

'अन्य देशों में बुनियादी ढांचे के विकास में भारत की भागीदारी'

जयशंकर ने राजनीतिक संबंधों में उतार-चढ़ाव के बावजूद लोगों के बीच सकारात्मक भावनाओं को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर मजबूत संबंध बनाने के लिए पिछले एक दशक में भारत के प्रयासों पर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि राजनीति ऊपर-नीचे हो सकती है लेकिन उस देश के लोगों में आम तौर पर भारत के प्रति अच्छी भावनाएं होती हैं और वे अच्छे संबंधों के महत्व को समझते हैं. अन्य देशों में बुनियादी ढांचे के विकास में भारत की भागीदारी का उल्लेख करते हुए एस जयशंकर ने कहा कि हम आज सड़क, बिजली, ईधन की आपूर्ति, व्यापार, निवेश में शामिल हैं. ये सब इस बात का हिस्सा है कि आप उन रिश्तों को कैसे विकसित करते हैं. कभी-कभी, चीजें अच्छे तरीके से नहीं चलती हैं और फिर आपको चीजों को वापस उस स्थिति में लाने के लिए लोगों को समझाना पड़ता है.

भारत और मालदीव के बीच कूटनीतिक विवाद 

भारत और मालदीव के बीच कूटनीतिक विवाद तब शुरू हो गया जब मालदीव के तीन नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया लक्षद्वीप यात्रा की आलोचना करते हुए उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां पोस्ट की. भारत ने टिप्पणियों की कड़ी निंदा की और विरोध दर्ज कराने के लिए मालदीव के दूत को बुलाया. मामला को बढ़ते देख मालदीव सरकार ने पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी से खुद को अलग कर लिया और तीन जूनियर मंत्रियों को निलंबित कर दिया.