अमेरिका की अदालत ने बुधवार को ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ सख्त आदेश दिया है. जज रिचर्ड ईटन ने अपने आदेश में कहा कि उन इंपोर्टर्स को अरबों डॉलर का रिफंड दिया जाए, जिन्होंने ट्रंप सरकार के गैरकानूनी टैरिफ चुकाए थे.
कोर्ट द्वारा पिछले महीने टैरिफ को अवैध घोषित किया गया था. जिसके बाद अब सरकार को ब्याज समेत रकम लौटानी होगी, जिससे लाखों ट्रेडर्स को राहत मिलने की संभावना है. सरकारी एजेंसी को लाखों शिपमेंट्स की लागत दोबारा तय करनी होगी, जिसमें टैरिफ को हटाना होगा.
सीबीपी ने कोर्ट में कहा कि यह काम बहुत बड़ा है. 70 मिलियन से ज्यादा एंट्रीज का मैनुअल रिव्यू हो सकता है. एजेंसी को चार महीने का समय चाहिए. लेकिन जज ने इसे खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि सीबीपी रोज रिफंड जारी करता है, जब इंपोर्टर ज्यादा पेमेंट करता है. ट्रेड एक्सपर्ट रायन माजेरस ने कहा कि यह आदेश साफ है इंपोर्टर्स को रिफंड का हक है. सरकार अपील कर सकती है या समय मांग सकती है. ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी के तहत इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (आईईईपीए) के जरिए टैरिफ लगाए गए. सरकार ने 130 अरब डॉलर से ज्यादा इकट्ठा किए.
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में इन्हें गैरकानूनी कहा था. रिफंड का कुल अमाउंट 175 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. करीब 300,000 इंपोर्टर्स प्रभावित हैं. ज्यादातर छोटे बिजनेस हैं. वे आसान रिफंड सिस्टम चाहते हैं. अगर मुश्किल प्रक्रिया हुई, तो कई रिफंड छोड़ सकते हैं. यह आदेश एटमस फिल्ट्रेशन कंपनी के केस में आया. कंपनी ने कहा कि उसने 11 मिलियन डॉलर का गैरकानूनी टैरिफ चुकाया. लगभग 2,000 केस कोर्ट में हैं. जज ईटन ने कहा कि वे हर केस नहीं सुनेंगे. वे एक आसान तरीका निकालना चाहते हैं, ताकि इंपोर्टर्स क्लेम कर सकें. ट्रेड अटॉर्नी जॉर्ज टटल ने कहा कि सीबीपी को रिफंड में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए. यह फैसला अमेरिकी व्यापार नीति पर बड़ा असर डालेगा. सरकार अपील कर सकती है. लेकिन इंपोर्टर्स को उम्मीद है कि जल्द रिफंड मिलेगा. छोटे बिजनेस को सबसे ज्यादा फायदा होगा. आने वाले दिनों में शुक्रवार की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी.