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'हम रूस से नहीं लड़ सकते लेकिन नाटो तैयार', क्यों ऐसा बोल गए हंगरी के प्रधानमंत्री

Russia Ukraine War: हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान ने कहा कि नाटो समूह में बुडापेस्ट अपनी प्रासांगिकता बनाए रखने के लिए कानूनी विकल्पों को आजमा रहा है. यूक्रेन संघर्ष में सदस्य देशों से अलग रुख के कारण हंगरी को समूह में अलग-थलग कर दिया गया है.

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Nato Pm
Courtesy: Social Media

Russia Ukraine War: नाटो देश हंगरी ने रूस यूक्रेन युद्ध पर अमेरिका और समूह के अन्य सदस्य देशों से अलग विचार रखा है. हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान ने कहा कि वह इस मामले पर सदस्य देशों से अलग राय रखते हैं. उन्होंने कहा कि नाटो समूह में हंगरी अपनी भूमिका पर विचार कर रहा है. एक रेडियो चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हंगरी ऐसे किसी भी संघर्ष से बचने का प्रयास करेगा जो सदस्य देशों को रूस से सीधे टकराव की ओर लेकर जा सकते हैं. हंगरी के पीएम ने कहा कि यूक्रेन पर रुख के कारण उसे पहले ही सैन्य संगठन में कमजोर कर दिया गया है. हालांकि वह आज भी नाटो के किसी भी ऑपरेशन में सहमति या असहमति का अधिकार रखता है. 

रिपोर्ट के मुताबिक, रेडियो चैनल से बातचीत में विक्टर ओर्बान ने कहा कि यूक्रेन संघर्ष में कीव का समर्थन न करने पर उसे सैन्य समूह में गैर-प्रतिभागी की भूमिका में डाल दिया गया है. हंगरी अब समूह में बने रहने के लिए कानूनी विकल्पों को अपना रहा है. हालांकि हंगरी के पास अभी भी सैन्य संगठन के किसी भी ऑपरेशन में सहमति या असहमति का अधिकार है. 

प्रधानमंत्री ओर्बान ने कहा कि नाटो समूह में हंगरी अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए कानूनी विकल्प आजमा रहा है. उन्होंने कहा कि हंगरी नाटो के अंदर पीस मेकिंग फोर्स के रूप में काम करना चाहता है. इसके अलावा नाटो के ऐसे ऑपरेशन से दूर रहना चाहता है जो इसकी परिधि से बाहर हों और जिससे समूह को खतरा न हो.  उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें एक नए दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता है. 

परमाणु हथियारों का इस्तेमाल 

उन्होंने कहा कि आज नाटो मुख्यालय ब्रुसेल्स और वॉशिंगटन  किस कदर जंग की तैयारी कर रहे हैं. इस तैयारी को देखने पर लगता है कि मिलिट्री ब्लॉक ने रूस से लड़ने के लिए सीधे हथियार निकाल लिए हैं. उन्होंने कहा कि इसे साफ तौर ऐसे समझा जाए जैसे समूचे यूरोप ने रूस के साथ जंग का रास्ता अपना लिया हो.  प्रधानमंत्री का कहना है कि ब्लॉक के कई सदस्य देश ऐसे हैं जो इस संघर्ष को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने इस युद्ध के भीषण परिणामों का भी जिक्र किया. पीएम ओर्बान ने कहा कि यह जंग नाटो देशों की ही नहीं बल्कि यूरोपीय संघ और रूस की होगी जिसमें परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की हमेशा आशंका बनी रहेगी. 

हंगरी ने नहीं दिया कीव का साथ

हंगरी ने फरवरी 2022 में संघर्ष की शुरुआत से ही यूक्रेन को नाटो द्वारा वित्तपोषित करने और हथियार देने का विरोध किया है. रूस के साथ युद्ध शुरु होने के बाद से हंगरी ने कीव  को किसी तरह की सैन्य सहायता नहीं भेजी है.  बुडापेस्ट दोनों देशों से संघर्ष विराम और विवादित मसलों का कूटनीतिक समाधान का आह्वान किया है.