जिस होर्मुज पर आज जंग छिड़ी है, वहां के असली निवासी कौन थे? सदियों पहले क्यों छोड़ दिया इलाका
होर्मुज जलडमरूमध्य आज दुनिया भर के लिए लड़ाई का मुद्दा बन गया है, लेकिन इसका असली इतिहास बहुत पुराना है. 10वीं से 17वीं सदी तक यहां 'होर्मुज राज्य' था, जो समुद्री व्यापार का बड़ा केंद्र था. यहां फारसी, अरब और भारतीय व्यापारियों का मिश्रण था. बाद में पुर्तगालियों और फिर फारसियों ने इस पर कब्जा किया.
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है. ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार पर असर पड़ रहा है. अमेरिका और इजरायल ईरान पर दबाव बना रहे हैं. लेकिन इस संकरे जलडमरूमध्य का अपना एक लंबा और रोचक इतिहास है. आज जहां सिर्फ तेल टैंकर गुजरते दिखते हैं, वहां कभी एक समृद्ध राज्य था जिसका नाम 'होर्मुज राज्य' था. यह क्षेत्र 10वीं से 17वीं सदी तक व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा. यहां फारसी, अरब और हिंद महासागर के व्यापारियों की मिली-जुली संस्कृति था.
होर्मुज राज्य का स्वर्ण काल
10वीं से 17वीं सदी तक होर्मुज राज्य फारस की खाड़ी का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था. यह राज्य फारस और अरब दोनों किनारों पर फैला हुआ था. यहां से भारत, फारस, अरब और अफ्रीका के बीच मसाले, रेशम, घोड़े और कीमती पत्थरों का व्यापार होता था. होर्मुज नाम की उत्पत्ति मध्य फारसी शब्द 'हुर-मोग' से मानी जाती है, जिसका अर्थ 'खजूरों की जगह' है. इस क्षेत्र में फारसी प्रभाव सबसे मजबूत था, लेकिन अरब व्यापारियों का भी गहरा संबंध था.
पुर्तगालियों का कब्जा और संघर्ष
1515 में पुर्तगालियों ने होर्मुज द्वीप पर कब्जा कर लिया और वहां 'कार्टाज' नाम की टोल प्रणाली शुरू की. उन्होंने इस क्षेत्र पर समुद्री नियंत्रण स्थापित किया. पुर्तगालियों के शासन में स्थानीय आबादी पर दबाव बढ़ा. 1622 में फारस के शाह अब्बास प्रथम ने पुर्तगालियों को हराकर होर्मुज को फिर से फारसी नियंत्रण में ले लिया. इसके बाद यहां की आबादी मुख्य रूप से फारसी (ईरानी) हो गई.
आबादी कैसे बदली?
शुरू में होर्मुज क्षेत्र में फारसी और अरब समुदायों का मिश्रण था. समुद्री व्यापार के कारण यहां भारतीय, अफ्रीकी और यूरोपीय लोग भी आते-जाते रहते थे. पुर्तगालियों के हमलों और अस्थिरता के कारण आबादी धीरे-धीरे मुख्य द्वीप से दूसरे द्वीपों जैसे किश और केश्म की ओर चली गई. 17वीं सदी के बाद यह क्षेत्र पूरी तरह ईरान के होर्मोजगान प्रांत का हिस्सा बन गया. आज यहां की अधिकांश आबादी फारसी भाषी ईरानी है.
आज का होर्मुज और उसका महत्व
आज होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के 20 प्रतिशत तेल का रास्ता है. लेकिन इसका पुराना इतिहास हमें याद दिलाता है कि यह सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि सदियों पुराना व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है. वर्तमान में ईरान इस रास्ते पर अपना नियंत्रण रखना चाहता है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी इसे खुला रखना चाहते हैं. इतिहास गवाह है कि होर्मुज हमेशा से शक्ति संघर्ष का केंद्र रहा है.
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