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बांग्लादेश में हिंदू होना हो गया है अपराध! युवक को पीटने के बाद जहर देकर उतारा मौत के घाट

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है. दरअसल, हाल ही में बांग्लादेश में एक हिंदू युवक को पहले पीटा गया और फिर जगह देकर मार डाला गया.

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Praveen Kumar Mishra

नई दिल्ली: बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. हाल के दिनों में एक और दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है. हिंसक विरोध प्रदर्शनों और प्रशासनिक कमजोरी के बीच अल्पसंख्यक समुदाय लगातार निशाने पर है.

बता दें कि शेख हसीना की सत्ता जाने के बाद से ही बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार नहीं थम रहा है. मोहम्मद युनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार अपराधियों पर लगाम नहीं लगा पा रही है और हिंदू के खिलाफ लगातार हिंसा की घटनाएं हो रही हैं.

युवक की बेरहमी से हत्या

8 जनवरी को सुनामगंज जिले के दिराई के भंगदोहोर गांव में जॉय महापात्रो नामक हिंदू युवक की जान ले ली गई. परिजनों का आरोप है कि जॉय को पहले बुरी तरह पीटा गया और बाद में उसे जबरन जहर खिला दिया गया. हालत बिगड़ने पर उसे सिलहट के एमएजी उस्मानी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. इस घटना ने स्थानीय हिंदू समुदाय को झकझोर कर रख दिया है.

बीते दिनों में कई हत्याएं

जानकारी के अनुसार पिछले 18 दिनों में सात हिंदू पुरुषों की हत्या हो चुकी है. दिसंबर से लेकर अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है. इन घटनाओं से यह साफ होता है कि जब शासन व्यवस्था कमजोर पड़ती है, तब अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा तेजी से बढ़ती है.

सरकार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

भारत के विदेश मंत्रालय ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है. मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों उनके घरों और व्यवसायों पर बार-बार हमले हो रहे हैं. ऐसी सांप्रदायिक घटनाओं से सख्ती से निपटना जरूरी है ताकि दोषियों को सजा मिले और पीड़ितों में सुरक्षा का भरोसा लौटे.

सांप्रदायिक घटनाओं का बढ़ता आंकड़ा

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले महीने सांप्रदायिक हिंसा की 51 घटनियां दर्ज की गईं. इनमें हत्याएं, लूटपाट, घरों और दुकानों पर हमले, मंदिरों को नुकसान पहुंचाने और आगजनी जैसी घटनाएं शामिल हैं. नए साल के शुरू होते ही चार और हिंदुओं की हत्या हो चुकी है, जो हालात की गंभीरता को दिखाती है.