'बैटल ऑफ बद्र' का संदेश या महज संयोग? अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद छिड़ी बहस

ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान पढ़ी गई कुरान की एक आयत ने पश्चिम एशिया की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है. क्या है इस आयत के मायने?

AI
Shanu Sharma

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में दुनिया भर के लोग पहुंचे. हालांकि इस दौरान घटी एक घटना ने इस पूरे कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया. दरअसल, अंतिम विदाई के दौरान कुरान की सूरह आल-इमरान की आयत 3:13 का पाठ किया गया, जिसे इस्लामी इतिहास में बद्र की लड़ाई से जोड़ा जाता है. 
 
ईरान में घटी इस घटनाक्रम को कई विश्लेषक विरोधियों के लिए एक सांकेतिक संदेश के रूप में देख रहे हैं. हालांकि, ईरान की ओर से आधिकारिक तौर पर इस आयत के पाठ को किसी सैन्य घोषणा या युद्ध की चेतावनी नहीं बताया गया है. फिर भी इसे लेकर पूरे पश्चिम एशिया में चर्चा तेज हो गई है.

शोक के साथ प्रतिरोध की भावना

तेहरान के ग्रैंड मुसल्ला परिसर में आयोजित अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. समारोह में देशभर से आए लोगों ने खामेनेई को श्रद्धांजलि दी. इस दौरान कई नेताओं और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की भी मौजूदगी रही, जिनमें सऊदी अरब का प्रतिनिधिमंडल भी शामिल था.

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के लोगों में इस वक्त शोक के साथ-साथ प्रतिरोध की भावना पल रही है. जिसका कुछ नजारा दुनिया के सामने साफ नजर आया. खामेनेई के अंतिम यात्रा के दौरान कई नेताओं और लोगों ने अपने नेता को मारने वालों के खिलाफ जमकर नारे लगाए और मारने तक की चेतावनी दे दी. इसके बाद पढ़ा गया यह आयत ने पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खिंचा है. ऐसे समय में जब क्षेत्र पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहा है, ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की अगली रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है.


क्या है बैटल ऑफ बद्र?

कुरान की जिस आयत का अंतिम संस्कार में पाठ किया गया, उसका संबंध इस्लाम के इतिहास में वर्ष 624 ईस्वी में हुई बद्र की लड़ाई से माना जाता है. यह युद्ध मदीना के निकट बद्र नामक स्थान पर लड़ा गया था, जहां अपेक्षाकृत छोटी मुस्लिम सेना ने बड़ी सेना पर जीत हासिल की थी. इस्लामी परंपरा में इस जीत को विश्वास, धैर्य और ईश्वरीय सहायता का प्रतीक माना जाता है. इसी कारण बद्र का उल्लेख आज भी कई बार संघर्ष, साहस और विपरीत परिस्थितियों में विजय के प्रतीक के रूप में किया जाता है.