नई दिल्ली: सोचिए, एक आलीशान क्रूज यात्रा, जहां लोग लाखों रुपये खर्च कर सुकून और रोमांच की तलाश में निकले हों, लेकिन वही सफर अचानक डर और अनिश्चितता में बदल जाए. अटलांटिक महासागर में चल रहे एक लक्जरी क्रूज पर ऐसा ही हुआ है. ‘एमवी होंडियस’ नाम के इस जहाज पर हंता वायरस का संक्रमण फैलने से यात्रियों में दहशत का माहौल है. समुद्र के बीच फंसे लोगों के लिए यह सफर अब एक खौफनाक अनुभव बन चुका है.
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस 'एमवी होंडियस' नाम के इस लग्जरी क्रूज के सफर के लिए 17-18 लाख रूपये की टिकट बुक करानी होती है. ट्रिप की अवधि, केबिन टाइप, रूट और सीज़न के हिसाब से ये टिकट और महंगी भी हो सकती है. लेकिन जरा सोचिये उनके बारे में जिन्होंने क्रूज पर सफर के क्रम में अपनी जान गंवा दी. इन्हें क्या पता था कि लाखों की टिकट के बदले ये मौत को दावत दे रहे हैं. जानलेवा वायरस फैलने के बाद से यात्रियों में खौफ व्याप्त है और हर कोई इस्वर से
यह मामला ‘एमवी होंडियस’ नाम के पोलर क्रूज से जुड़ा है, जिसे ओशनवाइड एक्सपीडिशंस संचालित करती है. जहाज 20 मार्च को अर्जेंटीना के उशुआइया से रवाना हुआ था और 4 मई को केप वर्डे पहुंचने वाला था. यात्रा के दौरान जहाज पर हंता वायरस का संक्रमण सामने आया. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इस घटना में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई अन्य संदिग्ध मामले सामने आए हैं.
क्रूज पर कुल 155 यात्री सवार थे. इनमें से छह लोगों में संक्रमण की आशंका जताई गई, जिनमें तीन की मौत हो चुकी है. एक व्यक्ति की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसे दक्षिण अफ्रीका में आईसीयू में भर्ती किया गया है. बाकी यात्रियों और क्रू में भी डर का माहौल है, क्योंकि बीमारी के फैलने की आशंका बनी हुई है.
कंपनी के मुताबिक, जहाज पर 87 यात्री विभिन्न देशों से हैं, जिनमें अमेरिका, यूके और स्पेन के लोग शामिल हैं. इसके अलावा 61 क्रू सदस्य भी मौजूद हैं. क्रू के दो सदस्यों में सांस से जुड़ी गंभीर समस्या देखी गई है और उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता की जरूरत है. जहाज पर मौजूद लोगों के लिए यह स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है.
हंता वायरस एक ऐसा संक्रमण है, जो आमतौर पर चूहों जैसे रोडेन्ट्स से फैलता है. यह वायरस इंसानों में गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है. संक्रमित चूहों के पेशाब, मल या लार के संपर्क में आने से यह फैलता है. इंसान से इंसान में इसका संक्रमण बेहद कम होता है. फिलहाल इस वायरस के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है.
इस वायरस से होने वाली बीमारी में शुरुआत में बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना और मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं. बाद में सांस लेने में दिक्कत और ब्लड प्रेशर गिरने जैसी गंभीर स्थिति हो सकती है. लक्षण आमतौर पर 2 से 4 हफ्तों में सामने आते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह जल्दी या देर से भी दिख सकते हैं. ऐसे में समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी है.