पिछले दो वर्षों से जारी इजरायल-हमास युद्ध के बीच, दोहा में हुए इजरायली हमले ने एक बार फिर से हमास की नेतृत्व पंक्ति को हिला दिया. इस हमले में शीर्ष नेताओं को निशाना बनाया गया था, जिनमें हमास के निर्वासित गाजा प्रमुख और वरिष्ठ वार्ताकार खलील अल-हय्या भी शामिल थे। हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक अल-हैया इस हमले में सुरक्षित बच निकले और संघर्षविराम वार्ता का सिलसिला जारी रखा.
1960 में गाजा पट्टी में जन्मे खलील अल-हय्या लंबे समय से हमास के लिए एक केंद्रीय चेहरा रहे हैं. 1980 के दशक में उन्होंने मुस्लिम ब्रदरहुड का हिस्सा बनकर राजनीतिक सफर की शुरुआत की, जिससे आगे चलकर हमास की नींव पड़ी. हैया ने संगठन के भीतर अहम जिम्मेदारियां संभालीं और 1987 से ही वे हमास के संस्थापक नेताओं में गिने जाते हैं.
उनका व्यक्तिगत जीवन भी इजरायली हमलों से बुरी तरह प्रभावित हुआ है. 2007 और 2014 में हुए हमलों में उनके कई करीबी रिश्तेदार मारे गए, जिनमें उनका बड़ा बेटा उसामा, बहू और पोते-पोतियां भी शामिल थे. इसके बावजूद उन्होंने संगठन के राजनीतिक कामकाज को जारी रखा और विदेशों में हमास का प्रतिनिधित्व संभाला.
हय्या को हमास और इजरायल के बीच कई संघर्षविराम वार्ताओं में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है. 2014 के संघर्ष को खत्म करने में उन्होंने अहम योगदान दिया था और मौजूदा युद्ध में भी वे एक प्रमुख मध्यस्थ के तौर पर उभरे हैं. 2022 में उन्होंने हमास का प्रतिनिधिमंडल दमिश्क ले जाकर सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद से संबंध सुधारने में अहम भूमिका निभाई. सीरिया के साथ दशक भर से टूटे रिश्तों को जोड़ने के इस प्रयास को हमास और ईरान समर्थित क्षेत्रीय गठबंधन की बड़ी रणनीति माना गया.
उनके तेहरान और दोहा के दौरे इस बात का सबूत रहे हैं कि वह हमास की राजनीतिक और कूटनीतिक रणनीतियों में गहरी पकड़ रखते हैं. जुलाई 2024 में इस्माइल हनियेह की ईरान में हत्या के दौरान वे उनके साथ मौजूद थे.
खलील अल-हय्या ने दावा किया था कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास का हमला सीमित पैमाने पर किया गया था, जिसका मकसद इजरायली सैनिकों को बंधक बनाकर फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई सुनिश्चित करना था. लेकिन यह हमला तेजी से व्यापक हो गया और इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था ढह गई. इजरायली आंकड़ों के अनुसार, इस हमले में करीब 1,200 लोगों की मौत हुई और लगभग 250 लोगों को अगवा कर लिया गया.
इसके बाद शुरू हुई इजरायल की जवाबी कार्रवाई ने गाजा को तबाह कर दिया. गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अब तक 64,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं. इस बीच अल-हय्या या संघर्षविराम वार्ताओं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिलिस्तीनी मुद्दे को दोबारा चर्चा के केंद्र में लाने में सफल रहे हैं.
आज खलील अल-हैया न केवल हमास की वार्ताओं का नेतृत्व कर रहे हैं, बल्कि संगठन के अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को भी मजबूत कर रहे हैं. ईरान और सीरिया से बेहतर होते संबंध, कतर में जारी राजनीतिक मौजूदगी और इजरायल से संघर्षविराम की कोशिशों ने उन्हें हमास का सबसे प्रभावशाली विदेशी चेहरा बना दिया है. आने वाले समय में वे न सिर्फ गाजा बल्कि पूरे फिलिस्तीनी आंदोलन की दिशा तय करने वाले नेताओं में गिने जाएंगे.