युद्ध की आग में जलती दुनिया, कई देशों में 72 प्रतिशत तक उछले पेट्रोल-डीजल के दाम; भारत पर क्या होगा इसका असर
ईरान-इजरायल युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है. कई देशों में 72 प्रतिशत तक उछाल आया है, जबकि भारत में अभी कीमतें स्थिर हैं. लेकिन भविष्य में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है.
नई दिल्ली: ईरान-इजरायल युद्ध के बीच दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे कई देशों में ईंधन महंगा हो चुका है. हालांकि भारत में अभी तक कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जिससे लोगों को राहत मिली है.
23 फरवरी 2026 तक वैश्विक बाजार में स्थिति सामान्य थी लेकिन युद्ध शुरू होते ही कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ने लगे. ब्रेंट क्रूड की कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई. यह करीब 45 प्रतिशत की वृद्धि है, जो युद्ध के गंभीर असर को दिखाती है.
क्या पड़ रहा इसका असर?
इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है. ग्लोबल स्तर पर पेट्रोल की औसत कीमत 1.20 डॉलर प्रति लीटर से बढ़कर 1.27 डॉलर हो गई है. वहीं डीजल की कीमत 1.20 डॉलर से बढ़कर 1.33 डॉलर प्रति लीटर तक पहुंच गई है. इससे साफ है कि डीजल पर असर ज्यादा पड़ा है.
अन्य देशों में कैसी है स्थिति?
दक्षिण पूर्व एशिया के कई देशों में हालात और भी खराब हैं. लाओस में डीजल की कीमतों में 72.4 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है. वियतनाम में पेट्रोल 50 प्रतिशत और डीजल 65.8 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है. कंबोडिया में भी डीजल 37.3 प्रतिशत बढ़ा है.
अफ्रीका और अमेरिका भी इस संकट से अछूते नहीं हैं. नाइजीरिया में पेट्रोल 39.5 प्रतिशत और डीजल 62.5 प्रतिशत महंगा हो गया है. अमेरिका में भी डीजल की कीमतों में 27.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है.
यूरोप में जर्मनी और स्पेन जैसे देश सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. जर्मनी में डीजल 25.3 प्रतिशत और स्पेन में 25.6 प्रतिशत तक महंगा हुआ है. बेल्जियम, डेनमार्क और फ्रांस में भी 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है.
इसके बावजूद भारत, चीन, रूस और सऊदी अरब जैसे देशों में अभी तक कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इन देशों में सरकारें कीमतों को नियंत्रित कर रही हैं या सब्सिडी दे रही हैं.
भारत पर क्या पड़ेगा इसका असर?
भारत पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है. कच्चे तेल की कीमत में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत के आयात बिल में लगभग 2 अरब डॉलर का इजाफा होता है. इससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और महंगाई में भी इजाफा हो सकता है.
ट्रांसपोर्ट, एविएशन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर पर भी इसका असर पड़ सकता है. हालांकि चुनावी माहौल के चलते फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम मानी जा रही है. लेकिन, अगर युद्ध लंबा चला तो भारत में भी पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं.
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