मुस्लिम देश इराक में नए कानून को लेकर बवाल मचा हुआ है. संसद में जोरदार हंगामा हो रहा है. पेश किए गए विधायक में लड़कियों की शादी की उम्र 9 साल करने का प्रस्ताव है. अभी तक इराक में लड़कियों के शादी को न्यूनतम उम्र 18 साल है. अब मानवाधिकार संस्थाएं इसपर काफी हो-हल्ला कर रही हैं.
इस विधायक के आलोचकों को कहना है कि इससे तलाक और बच्चों की कस्टडी समेत कई अधिकारों का हनन होगा. साथ इससे बाल विवाह का प्रचलन बढ़ेगा. शिया इस्लामिस्ट पार्टियों ने मिलकर एक फ्रेमवर्क तैयार किया, जिसमें इस बदलाव की बात है. मानवाधिर संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया है.
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज पर बुरा असर पड़ेगा. बाल विहाह से शिक्षा पर असर पड़ेगा. महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ेगी. यूनीसेफ के मुताबिक इराक में 28 फीसदी आबादी की शादी 18 साल की उम्र से पहले हो जाती है. साउथ सूडान और नाइजर में इसका ग्राफ सबसे ऊपर है, जहां 75 फीसदी से ज्यादा लड़कियां 18 साल से पहले ब्याह दी जाती हैं. इनमें से 30 प्रतिशत की उम्र 15 साल से भी कम होती है.
इराक में फिलहाल मोहम्मद शिया अल-सुदानी की सरकार है. उन्हें शिया पार्टियों का सपोर्ट है. शिया-बहुल इस देश की सरकार में शिया पार्टियों की बड़ी भूमिका होती है और वे अक्सर बड़े फैसले लेते रहे. इंटरनेशनल एनजीओ गर्ल्स नॉट ब्राइड्स के अनुसार, अब भी कानूनन 18 साल उम्र होने पर भी 7 फीसदी बच्चियों की शादी 15 साल का होने से पहले हो जाती है. इराक लंबे समय तक युद्ध झेलता रहा. मीडिल ईस्ट के दूसरे देशों के लोग यहां रहते हैं. साल 2023 के आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल इराक में ढाई लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड सीरियाई रिफ्यूजी हैं.