घाना के सबसे लंबे शख्स का 33 साल की उम्र में निधन, इस बीमारी के कारण थम गईं सांसें

घाना के सबसे लंबे व्यक्ति सुलेमाना अब्दुल सामेद का 33 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. उनकी दरियादिली, संघर्षपूर्ण जीवन और गांव को मिली पहचान ने लोगों को गहरे शोक में डुबो दिया.

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Sagar Bhardwaj

घाना के सबसे लंबे व्यक्ति सुलेमाना अब्दुल सामेद का 33 वर्ष की आयु में निधन हो गया. वह देश के उत्तरी हिस्से में रहने वाले लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय थे और सभी उन्हें प्यार से 'अवुचे' कहकर बुलाते थे. उनकी मौत की खबर सामने आते ही तमाले और उनके पैतृक गांव गाम्बागा में शोक की लहर दौड़ गई. परिवार के मुताबिक, लोग लगातार उनके घर पहुंचकर श्रद्धांजलि दे रहे हैं और उनके निधन की वजह जानना चाहते हैं.

पैरों के घाव बने जानलेवा

सुलेमाना को पैरों में गंभीर घाव होने के कारण तमाले के अस्पताल में भर्ती कराया गया था. संक्रमण बढ़ने से उनकी हालत बिगड़ती चली गई. परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने शुरुआती इलाज के बाद सुधार के संकेत दिए थे, लेकिन सोमवार सुबह अचानक उनकी मौत हो गई. चिकित्सकों के अनुसार, यह संक्रमण उनकी पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के कारण और गंभीर हो गया था.

दुर्लभ बीमारी ने बदल दी जिंदगी

करीब 22 वर्ष की उम्र में सुलेमाना के शरीर में असामान्य बदलाव शुरू हुए. बाद में डॉक्टरों ने उन्हें मार्फन सिंड्रोम नामक आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित बताया, जिससे उनके हाथ-पैर और शरीर का आकार लगातार बढ़ता गया. वर्ष 2022 में उनकी लंबाई 7 फीट 4 इंच (223 सेंटीमीटर) मापी गई थी और माना जाता है कि बाद के वर्षों में उनकी लंबाई और बढ़ गई थी. इस बीमारी के कारण उन्हें चलने-फिरने और सामान्य जीवन जीने में भी कठिनाई होती थी.


सपने टूटे, लेकिन हौसला नहीं

अत्यधिक लंबाई के कारण सुलेमाना को ड्राइवर बनने का सपना छोड़ना पड़ा. कभी फुटबॉल खेलने वाले और सक्रिय जीवन जीने वाले सुलेमाना बाद में छोटी दूरी तक पैदल चलने में भी असमर्थ हो गए. आर्थिक तंगी के कारण इलाज कराना भी उनके लिए आसान नहीं था. हाल ही में घाना के राष्ट्रपति के भाई और उद्योगपति इब्राहिम महामा ने उनके इलाज का खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली थी, जिससे परिवार को उम्मीद बंधी थी.

गांव की पहचान बन गया था 'दयालु दिग्गज'

सुलेमाना केवल अपनी लंबाई की वजह से नहीं, बल्कि अपने विनम्र और मददगार स्वभाव के कारण भी लोगों के दिलों में बसे हुए थे. वह जहां भी जाते, गर्व से अपने गांव गाम्बागा का नाम बताते और लोग उसी गांव को "सबसे लंबे व्यक्ति का गांव" कहकर पहचानने लगे थे. परिवार ने बताया कि बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की आशंका को देखते हुए उनका अंतिम संस्कार गाम्बागा की बजाय तमाले में करने का फैसला लिया गया. उनके निधन से पूरे क्षेत्र ने एक ऐसी शख्सियत खो दी है, जिसने अपनी मुस्कान और सादगी से अनगिनत लोगों का दिल जीता.