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प्राइवेर्ट पार्ट चोरी को लेकर 10 महीनों में 80 लोगों की हत्या, इन देशों में ये क्या हो रहा है?

अफ्रीका के छह देशों में गुप्तांग गायब होने की अंधविश्वासी अफवाहों के कारण 10 महीनों में 80 से अधिक लोगों की भीड़ द्वारा बेरहमी से हत्या कर दी गई है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
प्राइवेर्ट पार्ट चोरी को लेकर 10 महीनों में 80 लोगों की हत्या, इन देशों में ये क्या हो रहा है?
Courtesy: X

1 अप्रैल 2026 को तंजानिया में मैकेनिक बोनिफेस मगाला और उनके दोस्त पर भीड़ ने सिर्फ इस शक में हमला कर दिया कि उन्होंने किसी का गुप्तांग चुरा लिया है. इस हिंसा में मगाला के दोस्त की मौके पर ही मौत हो गई. अफ्रीका के कई देशों में महज एक छूने से गुप्तांग गायब होने की बेबुनियाद अफवाहों ने भयानक रूप ले लिया है.

10 महीनों में 6 अफ्रीकी देशों में 80 से अधिक मौतें

अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 के दौरान कांगो, तंजानिया, जाम्बिया, मोजाम्बिक, केन्या और मलावी में 80 से ज्यादा निर्दोष लोगों को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला. हत्या का तरीका एक जैसा है- भीड़ किसी अनजान व्यक्ति को घेरती है और उस पर स्पर्श से शरीर के अंग छोटे करने का झूठा आरोप लगाकर हमला कर देती है.

कांगो से शुरू हुआ अफवाहों का यह खौफनाक दौर

यह सिलसिला 2025 में कांगो के त्सोपो प्रांत से शुरू हुआ, जहां लोगों ने दावा किया कि अजनबियों के छूने से उनके अंग सिकुड़ गए. टिकटॉक और फेसबुक पर वायरल वीडियो और पादरियों द्वारा प्रार्थना से इलाज के दावों ने इसे और भड़काया. अक्टूबर 2025 में टीकाकरण के लिए आई मेडिकल टीम पर हमला कर डॉ. जॉन तांगकेया समेत 4 स्वास्थ्यकर्मियों की हत्या कर दी गई.

अन्य पड़ोसी देशों में तेजी से फैला अफवाह का जाल

यह अफवाह जल्द ही मोजाम्बिक, केन्या, मलावी और जाम्बिया जैसे पड़ोसी देशों में फैल गई. मोजाम्बिक में पिछले डेढ़ महीने में सबसे ज्यादा 55 हत्याएं हुईं, जिनमें पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी भी शिकार बने. जुलाई 2026 में केन्या में 5 और मलावी में 8 लोगों की जान इसी अंधविश्वास के कारण चली गई.

क्या है इस अफवाह के पीछे का मेडिकल सच?

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, केवल किसी के छूने से शरीर का कोई भी अंग छोटा या गायब होना पूरी तरह से असंभव है. मोजाम्बिक के राष्ट्रपति डेनियल चापो ने भी स्पष्ट किया कि इन दावों में कोई चिकित्सीय सच्चाई नहीं है. तंजानिया प्रशासन के मुताबिक, यह केवल आपराधिक मंशा और भय पैदा करने के लिए फैलाई गई अफवाह है.

मनोविज्ञान की नजर में क्या है 'कोरो सिंड्रोम'?

मनोवैज्ञानिक इस मानसिक स्थिति को 'कोरो सिंड्रोम' (Koro Syndrome) कहते हैं. यह एक सांस्कृतिक-मानसिक विकार है, जिसे 'मास हिस्टीरिया' या सामूहिक डर की बीमारी भी माना जाता है. इसमें व्यक्ति को भ्रम होता है कि उसका अंग सिकुड़ रहा है. पुलिस द्वारा अंग सुरक्षित होने की पुष्टि करने के बाद भी लोग मानसिक भ्रम के कारण नपुंसकता का दावा करते हैं.

अफवाह और हिंसा फैलने के 3 मुख्य कारण

अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र का खौफ: अफ्रीका में तांत्रिकों और जादू-टोने पर पुराना विश्वास है. 1990 के दशक में घाना और 2008 में कांगो में भी 'पेनिस थेफ्ट' की अफवाहों पर दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है. 

सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और व्यूज का खेल: कांगो के बाद यह भ्रम टिकटॉक और फेसबुक के जरिए फैला. मानवविज्ञानी जूलियन बोनहोम के अनुसार, चौंकाने वाले वीडियो देखकर लोग तुरंत विश्वास कर लेते हैं. कंटेंट क्रिएटर्स व्यूज के लिए ऐसे वीडियो बनाते हैं.

ठगों और फर्जी दवा बेचने वालों का जाल: बुर्किना फासो के समाजसेवियों के अनुसार, ठगों के गिरोह लोगों में नपुंसकता का डर दिखाकर फर्जी दवाएं और ताबीज बेचकर पैसे ऐंठते हैं. इसके अलावा, भू-राजनीतिक अफवाहों के जरिए भी जनता को भड़काया जाता है.

दुनिया के अन्य हिस्सों में भी रहा है कोरो सिंड्रोम का इतिहास

15वीं-16वीं सदी के यूरोप, 1967 में सिंगापुर (जहां सूअर का मांस खाने से अंग सिकुड़ने की अफवाह फैली थी), और 1990 के दशक में चीन में भी ऐसे मामले देखे गए थे. भारत में भी 1980 के दशक में असम और पश्चिम बंगाल में ऐसी अफवाहें फैली थीं. हालांकि, अफ्रीका में अजनबियों के प्रति अविश्वास और हिंसक भीड़तंत्र ने इस मानसिक बीमारी को एक खौफनाक अपराध में बदल दिया है.