आगजनी... तोड़फोड़ और पुलिस से झड़प, सड़क पर उतरे लाखों छात्र; क्यों धधक रहा फ्रांस?
फ्रांस में छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब स्कूलों तक सीमित नहीं रहा है. उच्च शिक्षा में प्रवेश की व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ आंदोलन तेजी से देशव्यापी हो गया है.
France Student Protest: फ्रांस में अनगिनत छात्र इन दिनों सड़कों पर हैं और उनके विरोध की आवाज लगातार तेज होती जा रही है. शुरुआत स्कूलों में कक्षाओं के बहिष्कार और उन्हें बंद कराने से हुई थी, लेकिन अब यह आंदोलन देश के कई हिस्सों तक फैल चुका है. छात्रों की शिकायत सिर्फ पढ़ाई की व्यवस्था को लेकर नहीं है. वे शिक्षकों की कमी, खराब इमारतों, ज्यादा छात्रों वाली कक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था में असमानता को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं.
2.66 लाख लोग प्रदर्शनों में शामिल
6 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शनों का पैमाना काफी बड़ा रहा. फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, देशभर में करीब 2.66 लाख लोग प्रदर्शनों में शामिल हुए, जिनमें लगभग 56 हजार लोग पेरिस में थे. आयोजकों ने इससे कहीं अधिक करीब 4.5 लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया. कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई. गृह मंत्रालय के मुताबिक, उस दिन 488 लोगों को हिरासत में लिया गया.
स्कूलों की हालत ने बढ़ाया छात्रों का गुस्सा
यह आंदोलन 21 सितंबर को पेरिस क्षेत्र से शुरू हुआ था. छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार और स्कूलों की नाकेबंदी शुरू की. उनकी सबसे बड़ी शिकायत है कि स्कूलों में पर्याप्त संसाधन नहीं हैं. कई जगह शिक्षक अनुपस्थित रहते हैं और उनकी जगह कोई दूसरा शिक्षक नहीं आता. भीड़भरी कक्षाएं, लंबे समय तक चलने वाली पढ़ाई और खराब इमारतों ने भी छात्रों की नाराजगी बढ़ाई है. कुछ विद्यार्थियों ने टूटी दीवारों, पानी टपकने और खराब फर्नीचर की शिकायत की है.
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मांग सिर्फ पैसे बढ़ाने तक सीमित नहीं
छात्र अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति के साथ स्कूल भवनों की बेहतर देखभाल चाहते हैं. वे कम भीड़ वाली कक्षाएं और बेहतर दैनिक शैक्षणिक माहौल की मांग कर रहे हैं. उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए इस्तेमाल होने वाली ऑनलाइन व्यवस्था Parcoursup को लेकर भी असंतोष है. छात्रों का कहना है कि इसे सरल और ज्यादा पारदर्शी बनाया जाना चाहिए. आंदोलन में शिक्षा के अवसरों में असमानता का मुद्दा भी प्रमुख है, खासकर गरीब इलाकों के विद्यार्थियों के बीच.
आंदोलन में शिक्षक और अभिभावक भी हुए शामिल
धीरे-धीरे यह विरोध सिर्फ स्कूली छात्रों का आंदोलन नहीं रहा. विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी भी प्रदर्शन और नाकेबंदी में शामिल हो गए. शिक्षकों और सार्वजनिक क्षेत्र की यूनियनों ने भी आंदोलन का समर्थन किया. अभिभावक और अन्य लोग भी छात्रों के साथ खड़े हुए. कुछ लोगों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई. आंदोलन ने शिक्षा व्यवस्था के साथ युवाओं के भविष्य, असमानता और वयस्क जीवन में सुरक्षित जगह पाने की मुश्किलों को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है.