'चाहे मेरा जो भी हश्र हो....', शेख हसीना का बड़ा ऐलान, बताया कब लौटेंगी बांग्लादेश?
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने का संकल्प दोहराया है. उन्होंने कहा कि सत्ता नहीं, बल्कि देश में विकास और धर्मनिरपेक्षता की बहाली उनका उद्देश्य है.
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को कहा कि वह हर हाल में दिसंबर में अपने देश लौटेंगी, चाहे उन्हें जेल भेज दिया जाए या किसी अन्य कार्रवाई का सामना करना पड़े. दिल्ली से मीडिया के साथ वर्चुअल बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी वापसी का उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि बांग्लादेश को विकास और धर्मनिरपेक्षता के रास्ते पर वापस लाना है. उन्होंने कहा कि डर कभी भी उनके कर्तव्य का निर्धारण नहीं कर सकता.
देश से दूर रहकर भी जनता से जुड़ी रहीं
शेख हसीना ने कहा कि भले ही उन्हें अपना देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, लेकिन उनका रिश्ता बांग्लादेश की जनता से कभी नहीं टूटा. उन्होंने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने अपने देश को मुश्किल दौर से गुजरते देखा है. उनके अनुसार, मौजूदा हालात उस बांग्लादेश से बिल्कुल अलग हैं, जिसके निर्माण के लिए 1971 के मुक्ति संग्राम में लाखों लोगों ने बलिदान दिया था.
2024 के छात्र आंदोलन पर उठाए सवाल
पूर्व प्रधानमंत्री ने जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन को लेकर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि यह केवल शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन नहीं था, बल्कि संगठित समूहों ने सुधार की मांग को राजनीतिक हिंसा का माध्यम बना दिया. उनका दावा था कि उनकी सरकार ने शुरुआत में बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य के जरिए विवाद सुलझाने का प्रयास किया था, लेकिन हालात बाद में हिंसक हो गए.
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बांग्लादेश के भविष्य को लेकर जताई चिंता
शेख हसीना ने कहा कि मौजूदा समय में बांग्लादेश में भय का माहौल है और इसका असर घरों, कार्यस्थलों तथा शैक्षणिक संस्थानों तक दिखाई दे रहा है. उन्होंने दावा किया कि यह वह देश नहीं है, जिसे उन्होंने अपने कार्यकाल में विकसित करने का प्रयास किया था. हालांकि, इन आरोपों पर अंतरिम सरकार की ओर से इस खबर में कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति पर देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है, क्योंकि आने वाले समय में घटनाक्रम का असर वहां की राजनीति और शासन व्यवस्था पर पड़ सकता है.