इमरान खान को 14 और बुशरा बीबी को 7 साल जेल की सजा, भ्रष्टाचार मामले में कोर्ट ने सुनाई सजा

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीवी को पाकिस्तान की एक अदालत ने 14 और 7 साल जेल की सजा सुनाई है.

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Kamal Kumar Mishra

इस्लामाबाद: पाकिस्तान की एक अदालत ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को 19 करोड़ पाउंड के अल-कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले में दोषी पाया और दोनों को क्रमशः 14 और सात साल की जेल की सजा सुनाई.

भ्रष्टाचार निरोधक अदालत के न्यायाधीश नासिर जावेद राणा ने फैसला सुनाया, जिसे अलग-अलग कारणों से तीन बार टाला जा चुका था. आखिरी बार इसे 13 जनवरी को टाला गया था.

इमरान और बुशरा पर क्या हैं आरोप

न्यायाधीश नासिर जावेद राणा ने यह निर्णय आदिला जेल में स्थित अस्थायी अदालत में सुनाया. यह फैसला तीन बार टल चुका था. राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (NAB) ने दिसंबर 2023 में इमरान खान और अन्य के खिलाफ जांच शुरू की थी. आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रीय खजाने को 190 मिलियन पाउंड (लगभग 50 बिलियन पाकिस्तानी रुपये) का नुकसान पहुंचाया.

अल-कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामला पाकिस्तान के इतिहास में सबसे बड़े वित्तीय गलत कामों में से एक है. आरोप है कि इमरान खान और उनकी पत्नी ने एक प्रॉपर्टी टाइकून के साथ मिलकर सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया. आरोपियों में से अधिकांश विदेश में हैं, इसलिए मुकदमा सिर्फ इमरान खान और बुशरा बीबी पर चलाया गया.

अल-कादिर विश्वविद्यालय की भूमि से जुड़ा है मुद्दा

इस मामले में आरोप है कि इमरान खान और बुशरा बीबी ने ब्रिटेन की राष्ट्रीय अपराध एजेंसी द्वारा पाकिस्तान को लौटाए गए 50 बिलियन पाकिस्तानी रुपये का गलत उपयोग किया. इन पैसों का इस्तेमाल झेलम में अल-कादिर विश्वविद्यालय के लिए भूमि अधिग्रहण में किया गया. कहा जाता है कि यह भूमि विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए इस्तेमाल की गई, लेकिन इन धनराशियों का निजी लाभ के लिए दुरुपयोग हुआ.

प्रॉपर्टी टाइकून का नाम भी इस मामले में सामने आया है, जिन्होंने कथित तौर पर इमरान खान और बुशरा बीबी को विश्वविद्यालय की स्थापना में सहायता की. अदालत ने इस मामले में धन का गलत इस्तेमाल करने के लिए इमरान खान को 14 साल की सजा दी.

इमरान खान को बड़ा झटका

यह फैसला इमरान खान के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका है और पाकिस्तान की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला सकता है. इस निर्णय का असर पाकिस्तान में भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों और सरकारी पारदर्शिता पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है.