नई दिल्ली: 11 सितंबर 2001 की सुबह अमेरिका के सैन रामोन में दीना बर्नेट अपनी पांच वर्षीय जुड़वां बेटियों और तीन साल की बेटी के साथ टीवी पर न्यूयॉर्क में हुए हमलों की तस्वीरें देख रही थीं. दो विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकरा चुके थे और पूरे देश में दहशत फैल चुकी थी. इसी बीच उन्हें पता चला कि उनके पति टॉम बर्नेट भी एक विमान में सवार हैं. वह न्यूयॉर्क से लौट रहे थे और उन्होंने अपनी यात्रा योजना बदलकर यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 93 ली थी.
करीब 9:10 बजे दीना ने टॉम के मोबाइल पर फोन करना शुरू किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. कुछ देर बाद सुबह 9:27 बजे अचानक फोन बजा. दूसरी तरफ टॉम थे. दीना ने पूछा, 'क्या तुम ठीक हो?' जवाब सुनकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. टॉम ने बताया कि विमान का अपहरण हो चुका है और एक यात्री को चाकू मारा जा चुका है. उन्होंने दीना से अधिकारियों को सूचना देने के लिए कहा.
दीना ने तुरंत अमेरिका के आपातकालीन नंबर 911 पर संपर्क किया. इसके बाद अधिकारियों से बात हुई. टॉम से दोबारा बात होने पर दीना ने उनकी कही हर बात नोट करनी शुरू कर दी. करीब 9:34 बजे टॉम ने फिर फोन किया. उन्होंने बताया कि जिस व्यक्ति को चाकू मारा गया था, उसकी मौत हो चुकी है और उन्होंने उसकी मदद करने की कोशिश की थी.
इसी बातचीत में दीना ने टॉम को बताया कि पूर्वी तट पर कई विमानों का अपहरण हुआ है. वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले की जानकारी मिलने के बाद टॉम को पहली बार अंदाजा हुआ कि विमान में बैठे लोगों के सामने खतरा कितना बड़ा है. उन्हें समझ आया कि अपहरणकर्ताओं का मकसद सिर्फ विमान पर कब्जा करना नहीं था.
टॉम को धीरे-धीरे शक हुआ कि विमान को किसी जगह टकराने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्होंने दीना से कहा कि अपहरणकर्ता विमान को जमीन पर गिराने की बात कर रहे हैं. उन्हें यह आत्मघाती मिशन जैसा लगने लगा. इसी दौरान फ्लाइट 93 के यात्रियों के सामने एक बेहद कठिन फैसला खड़ा हो गया. अब उनके पास इंतजार करने के अलावा कुछ करने का विकल्प तलाशना जरूरी था.
करीब 9:45 बजे दीना ने टीवी पर पेंटागन पर हमले की खबर देखी. उन्होंने टॉम को भी इसकी जानकारी दी. रिपोर्टों से यह संकेत मिलने लगा था कि कई विमानों को हाईजैक किया गया है. टॉम ने अपहरणकर्ताओं के बम वाले दावे पर भी सवाल उठाया. उन्हें शक था कि बम की बात यात्रियों को डराकर नियंत्रण में रखने के लिए कही जा रही है.
इसके बाद टॉम ने दीना को बताया कि उन्हें विमान को वापस लेने के लिए कुछ करना होगा. उन्होंने कहा कि कई यात्री उनके साथ हैं और एक समूह के तौर पर योजना बनाई जा रही है. दीना को टॉम की आवाज में घबराहट के बजाय एक अलग तरह का संयम महसूस हो रहा था. वह जानती थीं कि विमान के अंदर बैठे लोग अब केवल अपनी स्थिति समझने की कोशिश नहीं कर रहे थे, बल्कि अगला कदम तय कर रहे थे.
फ्लाइट 93 के यात्रियों ने आखिरकार अपहरणकर्ताओं के खिलाफ विद्रोह किया. उनकी कोशिश विमान को उसके संभावित लक्ष्य तक पहुंचने से रोकने की थी. विमान बाद में पेंसिल्वेनिया के ग्रामीण इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हुआ और उसमें सवार सभी 40 यात्री और चालक दल के सदस्य मारे गए. 9/11 के हमलों में कुल 2,977 लोगों की जान गई. फ्लाइट 93 के यात्रियों की कहानी आज भी साहस और बलिदान की मिसाल मानी जाती है.