अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को धमकी देते नजर आ रहे हैं. हालांकि इन धमकियों का ईरान पर कोई खास प्रभाव पड़ता नजर नहीं आ रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दिनों पहले ईरान को चेतावनी देते हुए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया था. जिसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिका की सबसे बड़ी विफलता को याद दिला दिया.
ईरान ने अमेरिका द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन ईगल क्लॉ' का याद दिलाया. जिसमें अमेरिकी को दुनिया के सामने हार को स्वीकार करना पड़ा था. हालांकि अभी जैसे हालात है, राष्ट्रपति ट्रंप किसी भी हाल में हार मानने के लिए तैयार नहीं है. वह दिन-प्रतिदिन इस युद्ध को और ज्यादा घातक बनाने की तैयारी कर रहे हैं.
ट्रंप ने ईस्टर के दिन ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट शेयर करते हुए ईरान को चेतावनी दी. जिसमें उन्होंने लिखा कि अगर मंगलवार तक होर्मुज को नहीं खोला गया तो ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर हमला किया जाएगा. उन्होंने लिखा कि मंगलवार ईरान में पावर प्लांट डे और ब्रिज डे होगा. उन्होंने धमकी देते हुए लिखा कि उस बास्टर्ड स्ट्रेट को खोलो, तुम पागल बास्टर्ड, वरना नरक में जाना पड़ेगा.
History repeats itself.
— Iran in India (@Iran_in_India) April 5, 2026
Operation Eagle Claw, a historic US military failure in Iran’s Tabas Desert
April 24, 1980 pic.twitter.com/RY909OWrNI
ट्रंप द्वारा यह धमकी दो अमेरिकी पायलट को ईरान से बचाने के बाद आई है. इस बचाव अभियान के बाद ट्रंप और भी ज्यादा मजबूत नजर आ रहे हैं. उन्होंने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी बचाव अभियान बताया है. हालांकि ट्रंप की इन धमकियों का कुछ खास असर ईरान पर नजर नहीं आ रहा है.
ईरान के थाईलैंड दूतावास ने ट्रंप की इस धमकी का मजाक बनाते हुए कहा कि पोट्स किशोरों की तरह गालियां देते हैं. उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि अमेरिका उम्मीद से कहीं पहले ही पाषाण युग में पहुंच चुका है. वहीं भारत के ईरानी एंबेसी ने अमेरिका के दूखते नस पर हाथ रख दिया. उसने लिखा कि इतिहास खुद को दोहराता है.
पोस्ट में 24 अप्रैल, 1980 की बात दोहराई गई. जिसमें अमेरिका को ऑपरेशन ईगल क्लॉ के दौरान ईरानी रेगिस्तान में ऐतिहासिक विफलता का सामना करना पड़ा था. हालांकि इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति अपने दो सैनिकों को ईरान से निकालने में सफल रहे हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से पूरी दुनिया प्रभावित है. गैस और तेल सप्लाई चेन ब्रेक हो गया है, जिसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. ईरान इस जंग में अपने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को खो चुका है. जिसके बाद से दोनों देश के बीच जंग तेज हो गए हैं.