'Super Intelligence', ट्रंप ने रातों-रात बदल डाला AI का नाम; मस्क-जुकरबर्ग और पिचाई की मौजूदगी में हुआ बड़ा ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक चौंकाने वाला ऐलान करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नाम बदलकर सुपर इंटेलिजेंस कर दिया. व्हाइट हाउस में हुए इस कार्यक्रम में टेक जगत के कई बड़े नाम मौजूद रहे.

ANI
Reepu Kumari

नई दिल्ली: अमेरिका से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी टेक दुनिया को हैरान कर दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए घोषणा कर दी कि अब से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सुपर इंटेलिजेंस के नाम से जाना जाएगा. यह ऐलान America.gov नाम की नई वेबसाइट लॉन्च करने के मौके पर किया गया.

इस मौके पर टेक इंडस्ट्री के कई दिग्गज मौजूद रहे, जिनमें स्पेसएक्स और टेस्ला प्रमुख एलन मस्क, मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग, गूगल प्रमुख सुंदर पिचाई और एनवीडिया प्रमुख जेन्सेन हुआंग शामिल थे. ट्रंप ने कहा कि आर्टिफिशियल शब्द इस तकनीक की असली ताकत को सही तरीके से नहीं दिखाता, इसलिए यह बदलाव जरूरी था.

आखिर क्यों बदला गया नाम?

ट्रंप ने कार्यक्रम में कहा कि जब आप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहते हैं तो यह नकली जैसा लगता है, जबकि असल में यह तकनीक औद्योगिक क्रांति से भी बड़ी साबित होने वाली है. उन्होंने इसे एक्सट्रीम इंटेलिजेंस बताते हुए कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र में बाकी दुनिया, खासकर चीन से काफी आगे है. यही वजह है कि सरकारी दस्तावेजों में अब नया नाम इस्तेमाल होगा.


आदेश में क्या-क्या कहा गया है?

जारी आदेश के मुताबिक, सरकार की सभी शाखाएं अब आधिकारिक पत्राचार, सार्वजनिक बयानों और नीतिगत दस्तावेजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एआई की जगह सुपर इंटेलिजेंस और एसआई शब्द का इस्तेमाल करेंगी. साथ ही कार्यकारी शाखा अब किसी भी संदर्भ में पुराने शब्दों को मान्यता नहीं देगी. हालांकि मौजूदा कानूनों, अनुबंधों और पुराने रिकॉर्ड में कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, एलन मस्क और अन्य तकनीकी दिग्गजों ने सुपर इंटेलिजेंस पर हुई बैठक के बाद मीडिया को जानकारी दी.

पहले भी हो चुकी थी नाम को लेकर चर्चा

गौर करने वाली बात यह है कि ट्रंप ने पिछले हफ्ते ही अपने सोशल मीडिया फॉलोअर्स से एक पोल के जरिए पूछा था कि उन्हें सुपर इंटेलिजेंस या सुपीरियर इंटेलिजेंस में से कौन सा नाम पसंद है. ब्रांडिंग को लेकर ट्रंप का यह पुराना शौक रहा है, चाहे वह बिजनेस हो या राजनीति. इस बार भी उन्होंने अपने चहेते अंदाज में ही इस बड़े बदलाव का ऐलान किया.

आगे क्या होगा असर?

आदेश में साइंस एंड टेक्नोलॉजी सलाहकार को निर्देश दिया गया है कि वे सुपर इंटेलिजेंस की एक संघीय परिभाषा तैयार करें, जो इस तकनीक की मौजूदा क्षमताओं को सही तरीके से दर्शाए. हालांकि कई एक्सपर्ट्स इस फैसले पर सवाल भी उठा रहे हैं, क्योंकि सिर्फ नाम बदलने से तकनीक से जुड़े खतरों और नियमन की जरूरत खत्म नहीं होती. फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बदलाव आगे कैसा असर डालता है.