हूतियों के हमलों से खाड़ी में बढ़ा तनाव, क्या यमन में नया मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं डोनाल्ड ट्रंप?

सऊदी अरब पर हूती हमलों में तेजी के बीच पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कैंप डेविड से अचानक वापसी, अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट ने यमन में संभावित अमेरिकी कार्रवाई की अटकलों को तेज कर दिया है.

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Shanu Sharma

सऊदी अरब में हूतियों के हमलों के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. 19 सितंबर को रियाद को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइल हमले की कोशिश की गई, जिसे सऊदी सुरक्षा बलों ने रोकने का दावा किया. हूतियों ने भी रियाद और अन्य संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है.

इसके अलावा यानबू समेत कई इलाकों में भी हमलों की खबरें सामने आई हैं. यानबू सऊदी अरब के लिए महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र है, जिससे इन हमलों का क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ी है.

ट्रंप की अचानक वापसी ने बढ़ाई चर्चा

तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कैंप डेविड का कार्यक्रम बीच में छोड़कर व्हाइट हाउस लौटना चर्चा का विषय बन गया. इसी दौरान यमन में संभावित सैन्य विकल्पों पर विचार किए जाने की रिपोर्टें सामने आईं. हालांकि, किसी भी संभावित अमेरिकी कार्रवाई का दायरा और समय अभी स्पष्ट नहीं है. इससे पहले अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि वॉशिंगटन हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य हमले की योजना नहीं बना रहा, बल्कि सऊदी अरब को खुफिया और टारगेटिंग से जुड़ी सहायता दे रहा है.


B-1B बॉम्बर की उड़ान से भी अटकलें तेज

ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड से अमेरिकी B-1B लैंसर बॉम्बर की उड़ान का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद भी अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को लेकर चर्चा तेज हुई. फेयरफोर्ड पहले से अमेरिकी लंबी दूरी के बमवर्षकों की तैनाती का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. जुलाई में भी अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अभियानों में B-1 बमवर्षक का इस्तेमाल किया था. हालांकि, केवल किसी सैन्य विमान की उड़ान को हूतियों के खिलाफ आगामी हमले का प्रमाण नहीं माना जा सकता.

हूतियों के बढ़ते हमलों के बीच सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से सीधे सैन्य मदद की मांग की थी. रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर बातचीत भी हुई, लेकिन उस समय अमेरिका ने सीधे सैन्य हस्तक्षेप से इनकार किया और खुफिया तथा टारगेटिंग सहायता देने की बात कही थी. अब हूतियों की गतिविधियां बढ़ने और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर उनके प्रभाव के चलते अमेरिका पर आगे की रणनीति को लेकर दबाव बढ़ा है.

अमेरिकी मिशनों के लिए सुरक्षा अलर्ट

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राजनयिक मिशनों ने अपने नागरिकों को सुरक्षा संबंधी सावधानी बरतने को कहा है. क्षेत्र में तेजी से बदलती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों के निर्देशों पर नजर रखने की सलाह दी गई है. इस बीच हूती हमलों, सऊदी जवाबी कार्रवाई और ईरान से जुड़े व्यापक संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में स्थिति लगातार जटिल बनी हुई है. ऐसे में अमेरिका यमन को लेकर आगे क्या कदम उठाता है, इस पर क्षेत्रीय देशों के साथ-साथ वैश्विक बाजारों की भी नजर है.