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'जाओ कोई दूसरा बेवकूफ ढूंढो', PM मोदी के दोस्त ट्रंप ने भारत समेत BRICS देशों को दी कड़ी चेतावनी

Donald Trump: अमेरिका की सत्ता में बैठने से पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत BRICS देशों को कड़ी चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा कि जो देश यह सोच रहे हैं कि वे अमेरिकी डॉलर में लेनदेन नहीं करेंगे, उनको परिणाम भुगतना होगा. 

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Kamal Kumar Mishra

Donald Trump: अमेरिका में राष्ट्रपति पद पर शपथ लेने से पहले ही डोनाल्ड ट्रंप तेवर में हैं. इस बार उन्होंने भारत समेत ब्रिक्स देशों को कड़ी चेतावनी दी है. डोनाल्ड ट्रंप की यह टिप्पणी पिछले महीने ब्रिक्स बैठक के बाद आई है, जिसमें गैर-डॉलर लेनदेन को बढ़ावा देने और स्थानीय मुद्राओं को मजबूत करने पर चर्चा हुई थी.

जनवरी में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद दुनिया में टैरिफ युद्ध की दूसरी लहर देखने को मिल सकती है. अमेरिका के भावी राष्ट्रपति ने धमकी दी है कि अगर भारत समेत ब्रिक्स देश अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए अमेरिकी डॉलर को कम करते हैं या इसे किसी अन्य मुद्रा से बदलते हैं तो उन पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा. उनकी यह टिप्पणी अक्टूबर में ब्रिक्स की बैठक के बाद आई है, जिसमें गैर-डॉलर लेनदेन को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई थी. ब्रिक्स समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और अन्य देश शामिल हैं.

ट्रंप ने कहा ब्रिक्स को डॉलर से दूर जाते नहीं देख सकते

पिछले महीने हुए राष्ट्रपति चुनाव में निर्णायक जीत हासिल करने वाले रिपब्लिकन नेता ने कहा, "यह विचार कि ब्रिक्स देश डॉलर से दूर जाने की कोशिश कर रहे हैं और हम चुपचाप खड़े होकर देख रहे हैं, खत्म हो चुका है. हमें इन देशों से यह प्रतिबद्धता चाहिए कि वे न तो नई ब्रिक्स मुद्रा बनाएंगे और न ही शक्तिशाली अमेरिकी डॉलर की जगह किसी अन्य मुद्रा का समर्थन करेंगे, अन्यथा उन्हें 100% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा और उन्हें अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी बेचने से मना करना पड़ेगा."

ट्रंप ने कहा कि ब्रिक्स देश एक और "मूर्ख" की तलाश कर सकते हैं, लेकिन समूह अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर को किसी अन्य मुद्रा से प्रतिस्थापित नहीं कर पाएगा. ट्रंप ने कहा कि इस बात की कोई संभावना नहीं है कि ब्रिक्स अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर की जगह ले लेगा और जो भी देश ऐसा करने की कोशिश करेगा उसे अमेरिका को अलविदा कह देना चाहिए.

ब्रिक्स और डॉलर

ब्रिक्स देश जिनमें अब मिस्र, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हैं - ने अक्टूबर में रूस के कज़ान में आयोजित शिखर सम्मेलन में गैर-डॉलर लेनदेन को बढ़ावा देने और स्थानीय मुद्राओं को मजबूत करने पर चर्चा की थी. अब ट्रंप इस मसले पर अग्रेसिव मूड में नजर आ रहे हैं. अक्टूबर में शिखर सम्मेलन में "ब्रिक्स के भीतर संवाददाता बैंकिंग नेटवर्क को मजबूत करने तथा ब्रिक्स सीमापार भुगतान पहल के अनुरूप स्थानीय मुद्राओं में निपटान को सक्षम बनाने" के लिए एक संयुक्त घोषणा प्राप्त की गई थी.


हालांकि, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शिखर सम्मेलन के अंत में संकेत दिया कि बेल्जियम स्थित स्विफ्ट वित्तीय संदेश प्रणाली के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए अभी तक कोई विकल्प नहीं बनाया गया है. भारत ने भी कहा है कि वह डी-डॉलराइजेशन के खिलाफ है. अक्टूबर में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि यह न तो भारत की आर्थिक नीति का हिस्सा है और न ही देश की राजनीतिक या रणनीतिक नीतियों का. लेकिन उन्होंने कहा था कि ऐसे मामलों में जहां व्यापार भागीदार डॉलर नहीं लेते हैं या जब व्यापार नीतियों के कारण कोई समस्या उत्पन्न होती है, तो समाधान के उपाय किए जाते हैं.

ट्रंप-टैरिफ और भारत

भारत की टैरिफ व्यवस्था ने पहले भी ट्रंप को परेशान किया है. ब्राजील और चीन ने भी ऐसा ही किया है. 2025 के लिए उनकी टैरिफ योजना में संरक्षणवादी शासन के खिलाफ पारस्परिकता की अवधारणा शामिल है. चुनावों से एक महीने पहले ट्रंप ने स्पष्ट किया था कि अमेरिका को "असाधारण रूप से समृद्ध" बनाने की उनकी योजना में यह सबसे महत्वपूर्ण तत्व था. उन्होंने जोर देकर कहा था, "सबसे बड़ा चार्जर भारत है", लेकिन साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत-अमेरिका संबंधों की भी प्रशंसा की थी.