'अमेरिका को विदेशी टैलेंट लाने की जरूरत है...', H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर फीस के बाद भी ट्रंप ने दिया ये बयान; देखें वीडियो
डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा की फीस 1 लाख डॉलर करने के बावजूद कहा कि अमेरिका को विदेशी कुशल कर्मचारियों की जरूरत है. उन्होंने माना कि देश में कुछ खास तकनीकी प्रतिभाएं नहीं हैं.
नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर की नई फीस लगाने के बावजूद कहा है कि देश को अब भी कुशल विदेशी कर्मचारियों की जरूरत है. ट्रंप ने यह बयान मीडिया को दिए इंटरव्यू में दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका में कुछ विशेष प्रकार की तकनीकी प्रतिभा की कमी है, इसलिए कुछ क्षेत्रों में विदेशी पेशेवरों को लाना जरूरी है.
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में हर क्षेत्र के लिए जरूरी स्किल वाले लोग नहीं हैं. उन्होंने कहा आपको प्रतिभा भी लानी होगी. आपके पास कोई खास प्रतिभा नहीं होती और आपको लानी ही होगी, लोगों को सीखना होगा. आप लोगों को बेरोजगारी की कतार की तरह नौकरी से नहीं निकाल सकते और कह सकते हैं, 'मैं तुम्हें किसी कारखाने में लगा दूंगा. हम मिसाइलें बनाएंगे.' जब पत्रकार ने तर्क दिया कि अमेरिका में पहले से ही 'काफी प्रतिभाशाली लोग' मौजूद हैं, तो ट्रंप ने 'नहीं' में जवाब दिया.
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किस इंडस्ट्री में होता है ज्यादा इस्तेमाल?
यह बयान उस समय आया है जब उनकी सरकार ने एच-1बी वीजा की एप्लिकेशन फीस को बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दिया है. एच-1बी वीजा खासतौर पर टेक इंडस्ट्री में इस्तेमाल होता है, जहां गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी कंपनियां भारत और अन्य देशों से आईटी एक्सपर्ट्स को नौकरी देती हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल एच-1बी वीजा पाने वालों में 71 प्रतिशत भारतीय थे, जबकि चीन का हिस्सा सिर्फ 11.7 प्रतिशत रहा.
अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने क्यों किया मुकदमा?
नई नीति को लेकर अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. उद्योग जगत का कहना है कि यह फैसला अमेरिकी इनोवेशन और प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाएगा. वहीं, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने कहा कि सरकार इन मुकदमों का डटकर मुकाबला करेगी. उन्होंने कहा कि एच-1बी सिस्टम लंबे समय से फ्रॉड से भरा हुआ था और अब इसे अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने के लिए सुधारना जरूरी है.
किसके लिए लागू होगा फीस?
यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने सोमवार को स्पष्टीकरण दिया कि 1 लाख डॉलर की फीस केवल नए आवेदनों पर लागू होगी, जबकि 'चेंज ऑफ स्टेटस' या 'एक्सटेंशन ऑफ स्टे' वाले मामलों में यह शुल्क नहीं लिया जाएगा. अमेरिकी कानून के तहत हर साल 65,000 एच-1बी वीजा और 20,000 अतिरिक्त वीजा उन लोगों को दिए जा सकते हैं जिन्होंने अमेरिका से मास्टर्स या उससे उच्च डिग्री ली हो.
क्या अमेरिकी उद्योग जगत पर पड़ेगा इसका असर?
इस बीच, ट्रंप प्रशासन ने अपने दूसरे कार्यकाल में अवैध प्रवासियों पर सख्त रुख अपनाया है. हजारों लोगों को निर्वासित किया जा चुका है और कई शहरों में इमिग्रेशन अधिकारियों की मदद के लिए सैनिकों की तैनाती की गई है. उद्योग जगत को डर है कि इन सख्त नीतियों का असर अमेरिकी लेबर मार्केट पर पड़ सकता है.